पटना। नीतीश कुमार ने एनडीए के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल फागू चौहान को सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने महागठबंधन के समर्थन से नई सरकार बनाने के लिए 160 विधायकों का समर्थन पत्र भी राज्यपाल के समक्ष पेश कर दिया।
जीतन राम मांझी की पार्टी हम ने भी समर्थन की घोषणा कर दी है। इस तरह नीतीश कुमार को 164 विधायकों का समर्थन है जबकि सरकार बनाने के लिए 122 संख्या ही चाहिए। 164 में आरजेडी के 79, जदयू के 45, कांग्रेस के 19, लेफ्ट के 16, हम के चार और एक निर्दलीय विधायक हैं।
राजभवन से बाहर आने के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि मंगलवार को हुई जदयू के सांसद और विधायकों की बैठक में निर्णय लिया गया कि हमें एनडीए से बाहर हो जाना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि गठबंधन में शामिल बीजेपी से क्या परेशानी थी। उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी बाद में पार्टी की ओर से दी जाएगी। राजभवन से निकलने के बाद वे राबड़ी देवी के आवास पर पहुंचे। यहां उन्होंने तेजस्वी यादव से आगे की रणनीति पर चर्चा की।
पांच साल (जुलाई 2017) के बाद जदयू और बीजेपी का गठबंधन फिर टूट गया। इससे पहले 2013 में भी नीतीश कुमार ने बीजेपी से समर्थन वापस ले लिया था। उस समय भी उन्होंने आरजेडी के समर्थन से सरकार चलायी थी।