पटना। बिहार सरकार के बजट की सर्वाधिक राशि शिक्षा पर खर्च हो रही है। यह राशि बजट की 21 प्रतिशत है। राज्य सरकार की योजना इसे 25 प्रतिशत करने की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह जानकारी दी। वह भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आयोजन श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में किया गया था।
उन्होंने बिहार के सभी शिक्षकों से कहा कि आपलोग नियमित स्कूल जाएं और बच्चों को ठीक से पढ़ाएं। जो शिक्षक स्कूल में नहीं पढ़ाते हैं, उन पर कार्रवाई करें। शिक्षा के क्षेत्र में कई कदम उठाए गए हैं। शिक्षकों की बहाली, नए कॉलेज,यूनिवर्सिटी और शिक्षण संस्थानों की स्थापना की गई है।
पोशाक और साईकिल योजना शुरू कर लड़कियों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। आज लड़कों के बराबर लड़कियां मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हो रही हैं। इंजीनियरिंग एवं मेडिकल में लड़कियों के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में जितना काम हुआ है। यह मौलाना अबुल कलाम आजाद जी की देन है। देश को एकजुट करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वे हिंदुस्तान और पाकिस्तान बंटवारा के खिलाफ थे।
बिहार के स्कूलों में कक्षा तीन से आठ के बच्चों को ‘बापू की पाती’ एवं कक्षा 9 से 12 के बच्चों को ‘एक था मोहन’ किताब पढ़ाई जा रही है। इससे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (बापू) के बारे में बच्चे ठीक से जान सकेंगे। इसी तरह मौलाना आजाद की कहानी भी बच्चों को पढ़ाई जा रही है। नई टेक्नोलॉजी के माध्यम से बिहार में किए गए काम और आजादी की बातों को लोग जान सकेंगे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बेस्ट प्लस ऐप एवं बिहार स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार पोर्टल का शुभारंभ किया। वर्ष 2022-23 के लिए छात्र-छात्राओं की प्रोत्साहन राशि जारी की गई। ‘बैगलेस सुरक्षित शनिवार’ मार्गदर्शिका एवं डॉ मनेंद्र कुमार और डॉ रेखा कुमारी लिखित पुस्तक ‘दे बेसिक्स ऑफ एनिमल बिहेवियर’ का भी का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम को प्रसिद्ध पत्रकार दारेन शाहिदी, शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर, वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी, विकास आयुक्त विवेक कुमार सिंह एवं शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने भी संबोधित किया।