पटना। रबी मौसम में बिहार में खाद (उर्वरक) की कमी नहीं है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के आंकड़ों में 18 नवंबर तक बिहार में सभी तरह के खाद का क्लोजिंग स्टॉक 4.54 लाख मीट्रिक टन (एमटी) है। इनमें यूरिया 1.68 लाख एमटी, डीएपी 0.90 लाख एमटी, एमओपी 0.43 लाख एमटी, एनपीके 0.99 लाख एमटी एवं एसएसपी 0.54 लाख एमटी अभी भी स्टॉक में है।

बिहार के कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत ने 18 नवंबर को आंकड़ा जारी कर राज्य में खाद की कमी बतायी थी। उन्होंने कहा था कि रबी फसलों की बुआई के लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रही है। इससे किसान परेशान हैं। इन आंकड़ों को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने गलत बताते हुए वास्तविक आंकड़ा जारी किया है।
केंद्र सरकार पर उर्वरक नहीं भेजे जाने के आरोपों को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने भी खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में खाद की कमी नहीं है। बिहार सरकार किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में असक्षम साबित हो रही है। अपनी कमी छिपाने के लिए राज्य सरकार गलत आंकड़ा जारी कर रही है। आज भी राज्य सरकार के पास एक लाख 68 हजार मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। इसके बावजूद कृषि मंत्री खाद की कमी का रोना रो रहे हैं।
मंत्रालय के आंकड़ों में खाद की जरूरत एवं आपूर्ति : बिहार में रबी मौसम में यूरिया की जरूरत 12.70 लाख मीट्रिक टन है। एक अक्टूबर से 18 नवंबर तक 3.60 लाख मीट्रिक टन जरूरत के विरुद्ध 3.75 लाख एमटी उपलब्ध करायी गयी। इस दौरान राज्य सरकार 2.07 लाख एमटी यूरिया ही किसानों को उपलब्ध करा सकी। इस कारण क्लोजिंग स्टॉक में अभी भी 1.68 लाख एमटी यूरिया उपलब्ध है।
ऐसी ही स्थिति डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी के साथ भी है। रबी सीजन के लिए डीएपी की जरूरत 3.82 लाख एमटी है। एक अक्टूबर से 18 नवंबर तक 1.63 लाख मीट्रिक टन जरूरत के विरुद्ध 2.30 लाख एमटी उपलब्ध करायी गयी। इस दौरान किसानों 1.41 लाख एमटी डीएपी ही उपलब्ध करायी गयी। इस कारण क्लोजिंग स्टॉक में अभी भी 0.90 लाख एमटी उपलब्ध है।