पटना/नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बजट पूर्व बैठक में बिहार के वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कई सुझाव दिए। वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में बिहार के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में आनेवाली चुनौतियों की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि बिहार जैसे पिछड़े राज्यों की राजकोषीय घाटा सीमा राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की चार प्रतिशत की जाए। केंद्र प्रायोजित योजनाओं में विशेष सहायता के रूप में केद्र और राज्य का अनुपात 90ः10 होना चाहिए। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ एस. सिद्धार्थ भी बैठक में शामिल हुए।
केंद्रीय वित्त मंत्री को बिहार की ओर से दिए गए सुझाव :
1. आधारभूत संरचनाओं के विकास एवं परिसंपत्तियों के सृजन पर व्यय के लिए बिहार स्पेशल प्लान (दूसरे चरण) के रूप में 20,000 करोड़ राशि स्वीकृत की जाए।
2. केंद्र प्रायोजित योजनाओं की संख्या को नीति आयोग के निर्णय के अनुसार 30 तक ही सीमित रखा जाए। इससे अधिक की योजनाओं पर व्यय की जानेवाली राशि भारत सरकार शत-प्रतिशत वहन करे।
3. सिंगल नोडल एकाउंट में 40 दिन के अंदर राज्यांश जमा करने की शर्त समाप्त होनी चाहिए।
4. सेस और सरचार्ज को केंद्रीय विभाज्य पूल में शामिल करना चाहिए ताकि इससे सभी राज्य लाभान्वित हो सके।
इनके अलावा केंद्रीय वित्त मंत्री को एक ज्ञापन भी दिया गया। इसमें राज्य की कई मांगों को रखा गया है।
1. पीएमजीएसवाई पथों के रख-रखाव में भी केंद्र से राज्यों को राशि मिले।
2. सुदूर पंचायत, गांव, हाट-बाजार को प्रखंड, अनुमंडल एवं जिला से जोड़ने के लिए अतिरिक्त सुलभ संपर्क योजना के तहत राज्यों को फंड उपलब्ध कराई जाए।
3. ऊर्जा के क्षेत्र में वन नेशन वन टैरिफ लागू होना चाहिए।
4. राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र की स्थापना दरभंगा में की जाए।
5. कोशी-मेची नदी जोड़ योजना का क्रियान्वयन हाई पावर्ड कमिटी की अनुशंसा के आधार पर हो।
6. राज्य में स्वास्थ्य प्रक्षेत्र के विकास के लिए आगामी बजट में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराई जाए।
7. समग्र शिक्षा के तहत शिक्षकों के वेतन मद में कटौती की गई राशि राज्यों को मिले।
8. कक्षा एक से आठ तक के पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग के छात्रों को भी प्रधानमंत्री यशस्वी योजना के तहत 50ः50 के अनुपात में छात्रवृत्ति मिले।