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दो दिवसीय मखाना महोत्सव सह राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

पटना। दो दिवसीय मखाना महोत्सव (29-30 नवंबर) सह राष्ट्रीय सम्मेलन, 2022 का शुभारंभ कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत ने ज्ञान भवन में किया। इस मौके पर बिहार मखाना ऐट ए ग्लांस पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। मखाना महोत्सव के आयोजन का मुख्य उद्देश्य उत्पादक, खरीदार और निर्यातकों को एक मंच पर लाना है। साथ ही मखाना की बढ़ती निर्यात क्षमता की जानकारी देना है।

महोत्सव के दूसरे दिन 30 नवंबर को क्रेता-विक्रेता की बैठक होगी। इसमें फ्लिपकार्ट, रिलायंस रिटेल, बिग बास्केट और देहात जैसे खरीदार और दो सौ से अधिक विक्रेता शामिल होंगे।

कृषि मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार के मखाना की विशिष्ट पहचान के लिए मिथिला मखाना के नाम से जीआई टैग मिला है। बिहार दुनिया में मखाना का सबसे बड़ा उत्पादक है। देश में उत्पादित मखाना का लगभग 90 प्रतिशत बिहार में होता है। 171 प्रतिशत वृद्धि के साथ 35 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मखाना का उत्पादन हो रहा है।

पॉप मखाना का उत्पादन वर्तमान समय में लगभग 23.50 हजार टन हो गया है। बिहार के आठ जिलों में व्यापक रूप से मखाना की खेती होती है। बिहार के आठ जिलों कटिहार, दरभंगा, सुपौल, किशनगंज, पूर्णियां, सहरसा, अररिया और पश्चिमी चंपारण में सरकार किसानों को मखाना की खेती के लिए 75 प्रतिशत अनुदान दे रही है।

कृषि सचिव डॉ एन. सरवण कुमार ने कहा कि मखाना में प्रोटीन की मात्रा अधिक और वसा की मात्रा कम होती है, इसलिए खिलाड़ी से लेकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में मखाना काफी लोकप्रिय है। सात कृषि उत्पादकों को एपीडा के सहयोग से सीधे निर्यात के लिए लाइसेंस मिला है। इससे कृषक उत्पादक कंपनियां स्वयं अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पाद बेच सकेंगी। लुलु समूह ने भी उत्पाद खरीदने के लिए अपनी इच्छा जताई है।

इस अवसर पर उद्यान निदेशक नंद किशोर, एपीडा के क्षेत्रीय प्रमुख डॉ सीबी सिंह, भारतीय पैंकेजिंग संस्थान के निदेशक डॉ ननवीर आलम, बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

 

 


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