पटना। बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बजट पूर्व ज्ञापन दिया है। इसमें राज्य के आर्थिक विकास से संबंधित कई सुझाव दिए गए हैं। चैंबर अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने कहा कि पूर्वाेत्तर क्षेत्र की नीति के पैटर्न पर बिहार के लिए भी एक पॉलिसी पैकेज की घोषणा होनी चाहिए।
बजट पूर्व दिए गए महत्वूपर्ण ज्ञापन :
प्रत्यक्ष कर : टीडीएस/टीसीएस के विलंब से भुगतान पर लगनेवाले दंड शुल्क के प्रावधान को युक्तिसंगत एवं व्यावहारिक करना चाहिए।
-- आयकर में सभी तरह की खरीद-बिक्री की स्क्रीप्ट बार जानकारी देने के प्रावधान में छूट दी जाए।
-- आयकर स्लैब को और तर्कसंगत बनाते हुए आयकर छूट सीमा कम-से-कम पांच लाख की जानी चाहिए। साथ ही कर दर को 5-10 लाख तक 10 प्रतिशत, 10-15 लाख तक 15 प्रतिशत, 15-20 लाख तक 20 प्रतिशत, 20-25 लाख तक 25 प्रतिशत एवं 25 लाख से ऊपर की आय के लिए 30 प्रतिशत रखा जाना चाहिए।
-- महिला वरीय नागरिकों के लिए सात लाख एवं सुपर सीनियर सिटीजन के लिए दस लाख तक की आय पर कर नहीं वसूला जाए।
-- यदि आयकर में वर्तमान स्लैब ही जारी रहता है तो वरिष्ठ नागरिक के लिए छूट की सीमा को धारा 87 ए के तहत बढ़ाकर न्यूनतम 7.50 लाख किया जाना चाहिए ।
-- लोगों में बचत की मानसिकता को बढ़ाने के लिए 80सी के तहत मिलने वाली छूट की वर्तमान सीमा 1,50,000 लाख को बढ़ाकर 2,50,000 किया जाए।
-- राज्य में लगने वाले नये उद्योगों के लिए पूर्व में आयकर अधिनियम 80 1बी(5) के तहत तीन से पांच साल के लिए आयकर में छूट दी गई थी। इसे एक अप्रैल 2004 से वापस ले लिया गया है। इसे फिर से बहाल करना चाहिए ।
विनिर्माण सेक्टर : राज्य में लगने वाले उद्योगों को कम-से-कम पांच साल के लिए कर अवकाश मिले।
-- ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए पूंजी निवेश सब्सिडी दर को आकर्षक बनाना चाहिए । इससे युवाओं का पलायन रुकेगा और बड़े शहरों की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण लगेगा ।
-- नालंदा जिले में आयुध निर्माण की स्थापना के बाद हुए ढांचागत विकास को देखते हुए इस प्रकार की इकाई राज्य के अन्य भागों में भी स्थापित हो।
पर्यटन सेक्टर : राज्य में एक भी फाइव स्टार होटल नहीं है। होटल इंडस्ट्रीज़ को बढ़ावा देने के लिए कम-से-कम पांच साल के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों में अवकाश की सुविधा मिले।
जीएसटी : बुनियादी सुविधाओं की कमी एवं जीएसटी के जानकार सलाहकारों की कमी के कारण राज्य के ग्रामीण एवं छोटे शहरों के व्यवसायियों को काफी कठिनाई हो रही है। अतः जीएसटी मित्र की व्यवस्था होनी चाहिए। यह व्यवस्था पीपीपी मोड पर भी किया जा सकता है ।
-- प्रत्येक पंजीकृत व्यवसायी को पूर्ण लेखा सॉफ्टवेयर निःशुल्क उपलब्ध कराया जाए।
-- वैसे व्यवसायी जो समय पर अनुपालन कर देते हैं, उनके खाते में नकद प्रोत्साहन राशि दी जानी चाहिए ।
-- राज्य में अविलंब जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना हो।
-- जीएसटीआर-3बी में संशोधन का प्रावधान होना चाहिए ।
-- बिहार में किसी भी कॉमर्शियल बैंक का प्रधान कार्यालय स्थापित कराया जाए। इससे राज्य के आर्थिक विकास को गति मिल सकेगी।
-- बिहार-झारखंड के उद्योग एवं व्यवसाय के हित में पटना में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) एवं इनकम टैक्स सेटलमेंट कमीशन के एक-एक बेंच की स्थापना होनी चाहिए ।