पटना/नई दिल्ली। बिहार में जहरीली शराब से हो रही मौत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस भेजा है। आयोग ने अधिकारियों से चार हफ्ते के भीतर रिपोर्ट मांगी है। इसमें घटना की प्राथमिकी, अस्पताल में भर्ती पीड़ितों के उपचार और किसी तरह के मुआवजा देने समेत विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि घटना के लिए जिम्मेवार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर सारण जिले में जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा कि अप्रैल, 2016 से बिहार में शराब की बिक्री और सेवन पूरी तरह से बंद है, लेकिन राज्य में इसका क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो सका।
आयोग का कहना है कि यदि मीडिया की रिपोर्ट सही है, तो यह मानवाधिकार के लिए चिंता पैदा करती है। राज्य सरकार अपनी ही शराबबंदी की नीति लागू करने में विफल रही है। अवैध शराब की बिक्री और सेवन ने कई लोगों की जान ले ली।
15 दिसंबर को जारी मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए आयोग ने कहा है कि छपरा जिले के मढ़ौरा अनुमंडल अंतर्गत मशरक, इसुआपुर और अमनौर थाना क्षेत्र में जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत हुई है। मृतकों के परिजनों के अनुसार 50 से अधिक लोगों ने देसी शराब पी थी। पुलिस को आशंका है कि गांव वालों ने क्षेत्र की किसी दुकान से शराब खरीदी है।