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मानवाधिकार आयोग के बिहार दौरे का विरोध उचित नहीं

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सारण में जहरीली शराब से बड़ी संख्या में लोगों की मौत की जांच करने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम का आना एक रुटीन प्रक्रिया है। बिहार दौरे का राजनीतिक विरोध नहीं होना चाहिए।

मानवाधिकार आयोग की धारा 17(2) के अंतर्गत आयोग को अधिकार है कि राज्य सरकार की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने पर वह जांच के लिए अपनी टीम घटना स्थल पर भेज सकता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) एक स्वायत्त संस्था है। यह केंद्र सरकार के निर्देश पर काम नहीं करता है। आयोग ने भाजपा शासित राज्यों की घटनाओं पर भी संज्ञान लेकर जांच टीम भेजी है।

आयोग ने गुजरात के मोर्वी में दुर्घटना के बाद राज्य सरकार को नोटिस भेजी थी। भाजपा शासित यूपी के आगरा और मध्यप्रदेश के ग्वालियर में मानसिक आरोग्य केंद्र की जांच के लिए भी आयोग की टीम गई थी।

मोदी ने कहा कि बिहार में जब भाजपा सरकार में थी, तब जहरीली शराब से जुड़े कई मामलों का संज्ञान मानवाधिकार आयोग ने लिया था। संबंधित जिलों के एसपी और राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस देकर जवाब मांगा और तीन लाख रुपये तक मुआवजा देने का निर्देश दिया था।

 

 


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