नई दिल्ली/पटना । सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के जाति आधारित गणना कराने के निर्णय के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि याचिकाएं विचार करने योग्य नहीं हैं।
याचिकाकर्ताओं को पटना हाईकोर्ट जाने और कानून के अनुसार उचित उपाय खोजने की स्वतंत्रता है। कोर्ट ने कहा कि यह एक प्रचार हित याचिका है। याचिकाओं में कहा गया था कि जनगणना अधिनियम के तहत राज्य सरकार को गणना का अधिकार नहीं है।
एक याचिका में कहा गया था कि जातीय गणना की प्रक्रिया सर्वदलीय बैठक में हुए निर्णय के आधार पर शुरू की गई है। यह किसी सरकारी फैसले का आधार पर नहीं हो सकता। बिना विधानसभा से कानून पास किए इसे करवाया जा रहा है। इसलिए इसे रद्द किया जाए।
पीठ ने याचिका हाईकोर्ट की बजाय सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने पर सवाल उठाया। जस्टिस गवई ने कहा कि अगर इस तरह की जनगणना नहीं होगी, तो राज्य आरक्षण नीति सही तरीके से कैसे लागू कर पाएगी। कोर्ट ने जाति आधारित गणना से जुड़ीं तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि सभी याचिकाओं को वापस ले लिया गया मानकर खारिज किया जाता है।