पटना। स्वामी सहजानंद सरस्वती जयंती समारोह सह किसान-मजदूर समागम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शामिल होंगे। समारोह बापू सभागार में 25 फरवरी को होगा। राज्यसभा सांसद विवेक ठाकुर ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि देश के सबसे बड़े किसान नेता सहजानंद सरस्वती की जयंती और पुण्यतिथि पर बिहार में कोई भी राजकीय कार्यक्रम नहीं होता है। यहां तक कि बिहार सरकार की डायरी एवं कैलेंडर में भी उनकी जयंती और पुण्यतिथि चिन्हित नहीं है।

बिहार सरकार को बंद पड़ी बिहटा बाजार समिति को केंद्र सरकार के कृषि विभाग को सौंप देनी चाहिए। ताकि उत्कृष्टम किसान केंद्र स्वामीजी के नाम पर बन सके। साथ ही बिहटा का नामकरण स्वामी सहजानंद सरस्वती नगर किया जाये।
विवेक ठाकुर ने कहा कि सहजानंद सरस्वती आधुनिक भारत के सबसे बड़े किसान नेता एवं महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका जीवन अनुकरणीय है। एक तपस्वी की भांति उन्होंने अपना जीवनयापन किया। यह सौभाग्य की बात है कि उनकी कर्मस्थली बिहार रही।
समाज के सभी वर्गों के उत्थान की वे बात करते थे। 1927 में उन्होंने किसान सभा की स्थापना की और उसका केंद्र पटना के बिहटा को बनाया। यहीं से उन्होंने किसान आंदोलन को संचालित किया। बिहटा स्थित उनके आश्रम में सुभाष चंद्र बोस भी आए थे।
विवेक ठाकुर ने कहा यह दुखद है कि किसान आंदोलन के जनक तथा भारत की आजादी में अहम योगदान होने के बावजूद युग पुरुष को गुमनामी के अंधेरे में धकेल दिया गया। धर्म और समाज सुधार के क्षेत्र में उनका योगदान दयानंद और विवेकानंद की तरह है।
समाज सुधार में सहजानंद के अर्थपूर्ण हस्तक्षेप के लिए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने उन्हें दलितों का सन्यासी कहा। स्वामी सहजानंद सरस्वती की राजनीतिक कद को समझने के लिए सुभाष चंद्र बोस का यह कथन महत्वपूर्ण है कि ‘साबरमती आश्रम में मैंने खादी धोती पहने कई सन्यासी को देखा, लेकिन भारत का सच्चा सन्यासी मुझे पटना के बिहटा स्थित सीताराम आश्रम में मिला।
इस मौके पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल, प्रदेश महामंत्री सुशील चौधरी, प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक मनोज कुमार मौजूद रहे।
