पटना। देश की अर्थव्यवस्था में उद्यमियों का भी योगदान होता है। वे सरकार को कई तरह से टैक्स देते हैं। सरकार को उनके लिए भी पेंशन स्कीम लाने पर विचार करना चाहिए। बजट पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में बिहार उद्योग संघ (बीआईए) ने यह सुझाव दिया है।
बीआईए के अध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने कहा है कि वर्तमान में वैधानिक प्रावधान के अनुपालन में कमी या अनुपालन नहीं होने की स्थिति में क्रिमिनल केस चलाने का प्रावधान है। दंड के लिए जो दर निर्धारित है वह काफी ज्यादा है। उद्योग-व्यापार को आपराधिक मामलों की श्रेणी से बाहर रखना चाहिए।
सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) का देश की अर्थव्यवस्था एवं विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। कृषि क्षेत्र के बाद एमएसएमई में ही रोजगार के सर्वाधिक अवसर उपलब्ध हैं। सभी एमएसएमई उद्योग चाहे वे कॉरपोरेट सेक्टर में हो अथवा नहीं। उनपर आयकर की दर घटाकर 15 प्रतिशत और सेस किया जाना चाहिए।
पीएलआई स्कीम काफी सफल रहा है। इस स्कीम को देश के औद्योगिक रूप से पिछड़े राज्य तथा पिछड़े जिलों के लिए नये रूप में विशेष प्रोत्साहन के साथ लाने की जरूरत है। इससे क्षेत्रीय विषमता दूर होगी। एमएसएमई प्रक्षेत्र के उद्योगों को सभी प्रकार के ऋण के लिए बीमा सुरक्षा मिलनी चाहिए। इससे बैंक लोन देने में संकोच नहीं करेंगे।
आयकर की न्यूनतम छूट सीमा 2.50 लाख से बढ़ाकर पांच लाख तक की जानी चाहिए। आयकर की अधिकतम कर दर 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। टैक्स बढ़ाने से ज्यादा जरूरत आयकर वसूली पर ध्यान देने की है।
बीआईए ने बजट पूर्व ज्ञापन में बिहार के लिए विशेष पैकेज एवं लोन, शहरीकरण को बढ़ावा, पर्यटन एवं आधारभूत संरचना विकास से संबंधित सुझाव भी दिए हैं।