नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 2023-24 में 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि यह आंकड़ा 2022-23 के सात प्रतिशत और 2021-22 के 8.7 प्रतिशत से कम है। आम बजट से एक दिन पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर यह जानकारी दी।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि दुनियाभर की एजेंसियों ने भारत को सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था माना है। वित्त वर्ष 2024 में विकास की गति तेज रहेगी। कॉरपोरेट और बैंकिंग क्षेत्र के लेखा विवरण पत्रों के मजबूत होने से ऋण अदायगी और पूंजीगत निवेश शुरू होने का अनुमान है।
सर्वेक्षण के अनुसार वित्त वर्ष 2023 के दौरान भारत के आर्थिक विकास का मुख्य आधार निजी खपत और पूंजी निर्माण रहा है। इसने रोजगार के सृजन में मदद की है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मंदी के रुझानों से मौद्रिक मजबूती में कमी आई है। भारत में घरेलू मुद्रास्फीति दर छह प्रतिशत से कम रही है। इससे देश में पूंजीगत प्रवाह बढ़ा है और उद्योग जगत का रुझान बेहतर होने से निजी क्षेत्र में निवेश बढ़ा है।
एमएसएमई क्षेत्र के लिए ऋण में तेज वृद्धि हुई है। यह जनवरी-नवंबर, 2022 के दौरान औसत आधार पर 30.6 प्रतिशत रहा। केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय वर्ष 2023 के पहले 8 महीनों में 63.4 प्रतिशत तक बढ़ा है। यह वर्तमान वर्ष के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को गति देने का प्रमुख कारण रहा है।
आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2023 के लिए महंगाई दर 6.8 प्रतिशत रहेगी। यह लक्ष्य सीमा से अधिक है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार केेंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति वित्त वर्ष 2023 के दौरान काफी सुदृढ़ हो गई है। यह आर्थिक गतिविधि बढ़ने, प्रत्यक्ष कर एवं जीएसटी से होने वाले राजस्व में तेज उछाल से संभव हो सका है।