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हमें अपने नायकों को पहचानने की है जरूरत : चेतना समिति

पटना। अपने समाज के बीच नायकों को खोजने और उसे दुनिया के सामने प्रस्तुत करना बिहार खासकर मिथिला समाज के लिए जरूरत बन चुकी है। हमें खुशी है कि हम अपने बीच के नायक को पहचान कर उनका अभिनंदन कर रहे हैं। इंद्रक 80 वसंत कार्यक्रम के दौरान चेतना समिति की अध्यक्ष निशा झा ने ये बातें कहीं। कार्यक्रम का आयोजन महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह स्मारक समिति ने किया।

मैथिली के प्रसिद्ध साहित्यकार इंद्रकांत झा के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पटना के विद्यापति भवन के सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध इतिहासकार चितरंजन प्रसाद सिन्हा ने की। डॉ सिन्हा ने कहा कि समाज में नायकों की कमी नहीं है। नई पीढ़ी को उनके संबंध में जानकारी नहीं है। आज जरूरत है कि हम लोग छोटी-छोटी पुस्तिका के माध्यम से बच्चों के बीच इन नायकों की जीवनी को पहुंचाने का काम करें।

पूर्व सांसद विजय कुमार मिश्र ने कहा कि इंद्रकांत झा लोगों की मदद के लिए सदैव तैयार रहनेवाले व्यक्ति रहे हैं। पत्रकार किशोर केशव ने कहा कि इंद्रकांत झा ने 80 से अधिक किताबों की रचना की है। इस उम्र में भी इनकी सक्रियता इन्हें युवाओं का नायक बनाये हुए है।

1969 में स्थापित महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह स्मारक समिति के उपाध्यक्ष पंडित भवनाथ झा ने संस्था और कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मिथिला धरोहर की उपेक्षा हमें राष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार करती है। यह दुख का विषय है। हम अपने नायकों को भूल चुके हैं और नये नायक गढ़ने का काम छोड़ चुके हैं। कथाकार अशोक, डॉ वंदना, रघुवीर मोची, जयदेव मिश्र, चक्रधर झा, डां रंजना, श्रीराम तिवारी एवं आशीष झा ने भी अपने विचारों को रखा।

 


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