पटना। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती के किसान और श्रमिकों के प्रति विचारों को धरातल पर लाने की जरूरत है। इस काम में केंद्र सरकार पूरी तत्परता से जुटी है। स्वामी सहजानंद ने बिहार को अपनी कर्मभूमि बनाकर जमींदारी प्रथा का विरोध और श्रमिकों का नेतृत्व किया। जाति-धर्म से ऊपर उठकर देशभर के किसानों को एकत्रित करने का काम किया।
केंद्रीय गृह मंत्री पटना के बापू सभागार में स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती के अवसर पर आयोजित किसान-मजदूर समागम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने सन्यासी होने के बावजूद आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया। स्वामी जी ने उस वक्त कहा था कि जो अन्न और वस्त्र उपजाएगा, वह कानून बनाएगा। यह भारतवर्ष उसी का है, अब वही शासन चलाएगा ।

गृह मंत्री ने कहा कि किसान और मजदूर को भारत की सभी व्यवस्थाओं के केंद्र में लाने का काम स्वामी जी ने किया। आज स्वामी जी का बिहार गर्त में जा रहा है। हमें मिलकर इसे बचाने के लिए प्रयास करना होगा।
बिहार में डेयरी क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। यहां पानी, भूमि और मेहनतकश किसान हैं। अगर यहां व्यवस्था ठीक हो, तो बिहार पूरे देश में सबसे अधिक दूध उत्पादन वाला राज्य बन सकता है।
प्रधानमंत्री ने किसान को बजट के केंद्र में लाने का काम किया है। 2013-14 में पिछली सरकार का कृषि बजट 25 हजार करोड़ रुपये था। इस वर्ष का बजट बढ़ाकर एक लाख 25 हज़ार करोड़ रूपये हो गया है।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत देश के हर किसान के बैंक खाते में सालाना छह हजार रुपये डीबीटी के माध्यम से पहुंच जाता है। कृषि क्षेत्र में स्टार्ट-अप भी शुरू किए गए हैं। श्री अन्न यानी मोटे अनाज की योजना से हमारा ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का दुनियाभर के बाजार में पहुंच जाएगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ जाएगी।
नीमकोटेड यूरिया लाने से देश में यूरिया की कालाबाजारी बंद हो गई, लेकिन बिहार में कालाबाजारी चल रही है। अगर बिहार में भी डबल इंजन की सरकार बन जाए, तो बिहार देश का सबसे समृद्ध राज्य बन जाएगा।