पटना। महागठबंधन सरकार के वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अपना पहला बजट बिहार विधान मंडल में पेश किया। वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बजट का आकार 2,61,885.40 करोड़ रुपये रखा गया है। यह वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट अनुमान से 24,194.21 करोड़ रुपये अधिक है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.98 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जीएसडीपी 8,58,928 करोड़ रुपए अनुमानित है।
विभागों को स्थापना एवं स्कीम मद में आवंटित राशि : बजट में शिक्षा विभाग को सर्वाधिक 40450.91 करोड़ राशि मिली है। यह राशि बजट आवंटन का 15.45 प्रतिशत है।
कृषि विभाग के लिए 3639.78 करोड़ ( बजट आवंटन का 1.39 प्रतिशत) एवं उद्योग विभाग के लिए 1648.82 करोड़ ( मात्र 0.63 प्रतिशत) का प्रावधान किया गया है।
शिक्षा विभाग के बाद स्वास्थ्य विभाग को 16966.42 करोड़ (6.48 प्रतिशत), ग्रामीण विकास विभाग को 15,452.18 करोड़ (5.90 प्रतिशत), ग्रामीण कार्य विभाग को 11568.91 करोड़ (4.42 प्रतिशत), ऊर्जा विभाग को 11536.84 करोड़ (4.41 प्रतिशत), नगर विकास एवं आवास विभाग को 9709.15 करोड़ (3.71 प्रतिशत), समाज कल्याण विभाग को 8210.86 करोड़ (3.14 प्रतिशत) एवं पथ निर्माण विभाग को 5918.87 करोड़ (2.26 प्रतिशत) राशि आंवटित की गई है।
2,61,885.40 करोड़ रुपये के बजट में स्कीम व्यय 1,00,029.73 करोड़ और स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय 1,61,855.67 करोड़ रुपये अनुमानित है। प्रतिबद्ध व्यय में वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान एवं ऋण अदायगी शामिल हैं।
आय : राजस्व एवं पूंजीगत प्राप्तियों से 2,62,085.40 करोड़ रुपये अनुमानित है। राजस्व प्राप्तियों में केंद्र सरकार से प्राप्त एवं राज्य के अपने राजस्व शामिल हैं। पूंजीगत प्राप्तियों में उधार एवं कर्ज की वापसी समाहित हैं।
कर राजस्व : राज्य के कर राजस्व में वाणिज्य कर विभाग से 39,550 करोड़, स्टांप एवं निबंधन शुल्क से 6300 करोड़, परिवहन कर से 3300 करोड़ एवं भू राजस्व से 550 करोड़ राशि अनुमानित है।