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शराबबंदी की जानकारी लेने छत्तीसगढ़ से टीम आई पटना

पटना। बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी का अध्ययन करने छत्तीसगढ़ विधानमंडल सेे सात सदस्यों की एक टीम पटना आई है। टीम ने एक अणे मार्ग में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने अध्ययन दल को पूर्ण शराबबंदी लागू करने को लेकर किए गए प्रयासों की जानकारी दी।

छत्तीसगढ़ से आए प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष विधायक सत्यनारायण शर्मा, विधायक द्वारिकाधीश यादव, विधायक रश्मि आशीष सिंह, विधायक शिशुपाल सोरी, विधायक कुंवर सिंह निषाद, विधायक दलेश्वर साहु एवं विधायक पुरुषोत्तम कंवर ने भी अपनी बात रखी।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बिहार में लागू शराबबंदी की हर जगह प्रशंसा हो रही है। महिलाएं इसके फायदे बता रही हैं। शराबबंदी से सामाजिक और आर्थिक रूप से बदलाव हो रहा है। राज्य सरकार बापू के आदर्शों को अपना रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि हाल ही में चाणक्या लॉ यूनिवर्सिटी, पटना के सर्वे से जानकारी मिली है कि एक करोड़ 82 लाख लोगों ने शराब पीनी छोड़ दी है। बिहार में 99 प्रतिशत महिलाएं और 92-93 प्रतिशत पुरुष शराबबंदी के पक्ष में हैं।

शराबबंदी के बाद शराब कार्य से जुड़े लोगों को सतत् जीविकोपार्जन योजना के माध्यम से मदद दी जा रही है। इससे वे अन्य कार्यों से जुड़कर अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं। ताड़ी की जगह नीरा का उत्पादन शुरू कराया गया है। नीरा स्वास्थ्य के लिए अच्छी चीज है।

स्वयं सहायता समूह बनाकर उसका नामकरण जीविका किया गया। तत्कालीन केंद्र सरकार के मंत्री जयराम रमेश ने जीविका की काफी प्रशंसा की। पूरे देश में इसे ‘आजीविका’ नाम से शुरू किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार में आने के बाद से हम शराब के खिलाफ अभियान चलाते रहे हैं। शराब के कारोबार से बिहार को सालाना पांच हजार करोड़ रुपए राजस्व मिल रहा था, लेकिन लोगों का दस हजार करोड़ रुपए शराब पर खर्च हो रहा था। शराबबंदी लागू होने के बाद लोग उन पैसों का उपयोग अपनी जरूरत के लिए करने लगे। सब्जी, फल एवं दूध की बिक्री बढ़ी है। लोगों के खान-पान, शिक्षा एवं रहन-सहन में सुधार हुआ है।


 


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