पटना। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बिजली शुल्क ( टैरिफ) की घोषणा कर दी है। विभिन्न श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं के लिए जारी टैरिफ में फिक्स्ड चार्ज दोगुना एवं प्रति यूनिट चार्ज में 25 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। इससे उपभोक्ताओं का वर्तमान बिजली बिल डेढ़ गुना बढ़ जाएगा।
बिहार विद्युत विनियामक आयोग के टैरिफ आदेश पर बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) एवं बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स ने गहरी चिंता व्यक्त की है।दोनों संघों ने राज्य सरकार से अपील की है कि औद्योगिक इकाइयों के लिए भी सब्सिडी का प्रावधान किया जाए। ऐसा नहीं होने पर हमारे लिए बढ़ी राशि का भार सहन करना मुश्किल हो जाएगा।
बीआईए : अध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने टैरिफ आदेश पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग की जनसुनवाई के दौरान बीआईए ने तार्किक ढंग से बिजली कंपनियों के आवेदन पर आपत्ति दर्ज करायी थी। इसके बावजूद फिक्स्ड चार्ज एवं यूनिट चार्ज में वृद्धि की गई है। इस कारण अलग-अलग उपभोक्ताओं के लिए कुल वृद्धि 50 से 80 प्रतिशत हो रही है।
इतनी बड़ी वृद्धि किसी भी व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए सहन कर पाना मुश्किल होगा। इसका दूरगामी प्रभाव यह होगा कि राज्य में कार्यरत औद्योगिक इकाईयां उत्पादन लागत में वृद्धि से बाजार प्रतिस्पर्द्धा में पिछड़ जाएंगी। इसका असर नये औद्योगिक निवेश पर भी पड़ेगा।
बीआईए ऊर्जा उपसमिति के मेंटर संजय भरतिया ने कहा कि बिजली कंपनियां अपने घाटे की भरपाई उपभोक्ताओं पर बिजली दर में वृद्धि कर पूरी कर रही हैं। बिहार में विद्युत संचरण एवं अन्य आधारभूत संरचना के विकास पर जनता की प्रतिवर्ष करोड़ों राशि लगायी जाती है। इसके बावजूद राज्य में विद्युत संचरण एवं वितरण हानि आश्चर्यजनक रूप से 45 प्रतिशत के लगभग है, जो काफी ज्यादा है।
केंद्र एवं राज्य सरकार तथा विद्युत विनियामक आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि संचरण एवं वितरण हानि को घटाकर 15 प्रतिशत किया जाए। इस बड़ी हानि का प्रभाव राज्य के बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। बिजली कंपनियां घाटे की भरपाई उपभोक्ताओं पर विद्युत दर में बढ़ोत्तरी कर पूरी कर रही हैं।
एसोसिएशन के महासचिव गौरव साह ने कहा कि बिजली दर में की गई वृद्धि का प्रभाव लगभग तीन रुपये प्रति यूनिट हो रहा है। राज्य सरकार औद्योगीकरण के हित में बढ़ी राशि को अनुदान के रूप में एचटीआईएस उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराये। बिजली दर में की गई इस वृद्धि के मद्देनजर बीआईए की ओर से राज्य सरकार के संबंधित विभाग एवं पदाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स : अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने बताया कि बिहार विद्युत विनियामक आयोग के निर्णय से ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग ने उपभोक्ताओं के अनुरोध को खारिज कर दिया है।
बिहार में पहले से ही उद्योग के लिए बिजली दर पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक थी। चैंबर भी विभिन्न मंचों से सरकार से अनुरोध कर रहा था कि राज्य में बिजली दर को कम किया जाए या औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी का प्रावधान किया जाए।
चैंबर अध्यक्ष ने कहा कि बिजली दरों में अप्रत्याशित वृद्धि का प्रतिकूल प्रभाव यहां के उद्योगों पर पड़ेगा। जो उद्योग चल रहे हैं उन्हें भी अपनी यूनिट को बंद करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
उन्होंने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि जिस तरह कुछ श्रेणी के उपभोक्ताओं को बिजली बिल में सब्सिडी दी जाती है। उसी तरह औद्योगिक इकाइयों के लिए भी सब्सिडी का प्रावधान हो।
