पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक अप्रैल से बिजली दर में किसी तरह की वृद्धि नहीं करने की घोषणा की है। उन्होंने विधानसभा में कहा कि लोगों पर बिजली शुल्क वृद्धि का बोझ नहीं पड़े। इसलिए कैबिनेट की बैठक में बिजली दर नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
23 मार्च को बिहार विद्युत विनियामक आयोग के निर्णय के बाद से ही विपक्ष बिजली की नई दर का लगातार विरोध कर रहा था। सदन में हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को अब 13,114 करोड़ रुपये की सब्सिडी देनी होगी। पहले 8895 करोड़ रुपये सब्सिडी देनी होती थी। सरकार को बढ़ी राशि का भार वहन करना होगा।
मुख्यमंत्री ने सभी राज्यों को एक ही दर पर बिजली देने की मांग केंद्र सरकार से की है। उन्होंने कहा कि बिहार को अन्य राज्यों से महंगी बिजली मिल रही है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने कहा कि बिहार की अपनी बिजली यूनिट राज्य सरकार को एनटीपीसी को नहीं देनी चाहिए। इससे बिजली की दर कम हो सकती थी।
इसके जवाब में ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कोयला और रेल मंत्रालय केंद्र सरकार के पास है। बिहार को समय पर न कोयला मिलता था और न रेल रैक। ऐसी स्थिति में हमलोगों ने अपनी यूनिट को केंद्र सरकार को सौंपने का निर्णय लिया। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिहार को महंगी बिजली मिल रही है। केंद्र सरकर को वन नेशन वन टैरिफ लागू करना चाहिए।
