मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर जिले के आम में लाल धारीदार फल बेधक कीट (रेड बेंडड मैंगो कैटरपिलर) का प्रकोप देखा जा रहा है। इससे बचाव के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी अनुसंधान संस्थान, लखनऊ ने इन क्षेत्रों के आम उत्पादकों को सतर्क रहने एवं इससे बचाव की सलाह दी है।
संस्थान के निदेशक डॉ टी. दामोदरन ने बताया कि इस कीट का प्रकोप आम की प्रजाति हिमसागर पर एक अप्रैल से शुरू हो गया है। कीट फल के केवल निचले हिस्से में सुराख बनाकर छोटी अवस्था में ही फल को गिरा देता है। कीट प्रभावित फल यदि पौधों से लगे भी रहते हैं, तो बाजार के लिए उपयोगी नहीं होते हैं। कुछ वर्षों से मिलीबग और मधुवा कीट के बाद यह कीट एक नई समस्या बनकर उभरा है।
संस्थान के कीट वैज्ञानिक डॉ एच. यस. सिंह के अनुसार इस कीट का आक्रमण मसूर आकार के फलों से शुरू होकर पकने के पहले तक की अवस्था में होता है। फल पकने के शुरू होने पर यह कीड़ा पेड़ की छाल पत्ते या फिर डाल में छिप जाता है और अगले वर्ष फूल आने तक सोता रहता है।
जिन बागों में पिछले वर्ष यह कीट देखा गया है। उन किसानों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। अभी इसकी संख्या बहुत कम है। यह पहली पीढ़ी है। अगर समय पर इसका नियंत्रण नहीं किया गया, तो आगे चलकर यह कई गुना बढ़ जायेगा।
सलाह : कीट के नियंत्रण में कोई भी सिस्टमिक दवा काम नहीं करेगी। कांटेक्ट इंसेक्टिसाइड डालें। कीट के नुकसान को रोकने के लिए क्वीनलफास या क्लोरपैरिफोस 2 मिली/ ली या इमामेक्टिन बेंजोएट ०.५ /ली ग्राम की दर से डाल सकते हैं।
इस कीट में अंडा देने की प्रक्रिया जारी रहती है। आम का फल नींबू के आकार का हो, तो भी उसमें यह कीड़ा नुकसान कर सकता है। इस समय पर मेलाथियान 50 ईसी दवा 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव कर सकते हैं।
फल नींबू के आकार से बड़ा या फिर फल पकने की पहली अवस्था में हो तब भी यह कीट नुकसान कर सकता है। इस समय डेल्टामथ्रीन 2.8 ईसी दवा 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से या फिर लैम्डा साइहलोथ्रिन 5 ईसी दवा एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
आम के पेड़ काफी ऊंचे होते हैं। इस कारण दवा का छिड़काव पूरे पेड़ पर नहीं हो पाता है और ऊंचाई पर बैठे कीड़ों तक दवा नहीं पहुंच पाती है। इसलिए ऊंचाई तक दवा फेंकने वाले प्रेशर पंप का प्रयोग करें।
छेद वाले अथवा गिरे हुए फलों को नष्ट करें। ऐसा नहीं करने पर यह एक बाग़ से दूसरे बाग़ में जाकर नुकसान करेगा। यह कीट रात में अथवा सुबह ज्यादा सक्रिय रहता है। इसलिए दवा को कीट सक्रियता के समय छिड़काव करना चाहिए। कीटनाशक छवा हमेशा विश्वसनीय दुकान से लेनी चाहिए।