राजगीर। दुर्लभ जड़ी-बूटियों के लिए प्रसिद्ध वैभारगिरि पर्वत के कुछ हिस्सों में चार दिन पहले लगी आग का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हवाई सर्वेक्षण किया। इस घटना में जड़ी-बूटियों को काफी नुकसान हुआ है। हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने राजगीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में समीक्षा बैठक की। उन्होंने अगलगी के कारणों का पता लगाने का निर्देश दिया।
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अगलगी की घटना काफी दुखद है। पर्वत के ऊपर विभिन्न धर्मों का मंदिर है। वहां कई लोग भी रहते हैं। ऊपर रहनेवाले पर्यटकों पर विशेष नजर रखें। अगलगी से जो नुकसान हुआ है, उसे ठीक कराने के लिए शीघ्र कार्रवाई करें। इस तरह की घटना दोबारा न हो। इस पर विशेष नजर रखें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बचपन से हम यहां आते रहे हैं। इस तरह यहां अगलगी की घटना हमने पहले कभी नहीं सुनी थी। राजगीर देश ही नहीं, दुनिया का पौराणिक स्थल है। यहां विकास के कई कार्य कराए गए हैं। इस तरह की घटना से सबकुछ बर्बाद हो जाएगा। आग लगने की जानकारी मिलने पर मुझे काफी तकलीफ हुई है।
वर्ष 2009 में इस पर्वतीय क्षेत्र को हरा-भरा करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए यहां के पर्वतों पर हेलीकॉप्टर से बीज का छिड़काव कराया गया। पर्यटन को बढ़ावा देने एवं पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां कई काम किये गए हैं। उन्होंने कहा कि पर्वत के ऊपर का कुछ हिस्सा केंद्र सरकार के अधीन है। उस हिस्से को भी हमलोगों को अपनी तरफ से सुरक्षित रखना होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष यहां मलमास मेला लगनेवाला है। मान्यता है कि इस दौरान 33 करोड़ देवी-देवता यहां वास करते हैं। प्रत्येक तीन वर्ष पर यहां मलमास मेला लगता है। इसके लिए भी राज्य सरकार की तरफ से पूरी व्यवस्था की जाती है।
बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री, सांसद एवं विधायक, मुख्य सचिव, होमगार्ड एवं अग्निशमन सेवाएं की डीजी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, जिला वन पदाधिकारी, डीएम एवं एसपी मौजूद थे।