पटना/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई मामले में बिहार सरकार के साथ आनंद मोहन को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दो सप्ताह में बिहार सरकार से रिहाई की पूरी प्रक्रिया का ब्योरा मांगा है। आईएएस अधिकारी जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेके महेश्वरी की बेंच सुनवाई कर रही है।
जी. कृष्णैया की हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आनंद मोहन की रिहाई का उमा कृष्णैया ने विरोध किया था। उन्होंने बिहार सरकार पर जेल मैनुअल में बदलाव करने पर भी सवाल उठाया था।
बिहार सरकार ने कारा अधिनियम में बदलाव कर अप्रैल, 2023 में आनंद मोहन समेत 26 कैदियों को रिहा कर दिया था। इसके बाद से यह सवाल उठ रहा था कि क्या कानून में किया गया बदलाव 15 साल पहले सुनाई गई सजा पर लागू होगा ? पटना हाईकोर्ट में भी इस पर पीआईएल दायर की गई है।
क्या था मामला : 5 दिसंबर,1994 को गोपालगंज के डीएम जी. कृष्णैया की हत्या एक भीड़ में मुजफ्फरपुर जिले से गुजरने के दौरान हुई थी। आनंद मोहन पर उस भीड़ को उकसाने का आरोप था। इस मामले में आनंद मोहन को 2007 में फांसी की सजा सुनाई गई। बाद में पटना हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया ।