पटना। उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने कहा कि बिहार को उपभोक्ता राज्य से उद्यमी राज्य बनाना है। सफल व्यवसाय और उद्योग की स्थापना में लगभग पांच साल लग जाता है। इसलिए धैर्य के साथ मेहनत करते रहें। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के 1300 लाभुकों को पहली किस्त की राशि के भुगतान के मौके पर ज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यशाला को उद्योग मंत्री संबोधित कर रहे थे।
उद्योग मंत्री ने कहा कि हम सभी बिहार के हैं। मेहनत हमारी संस्कृति का हिस्सा है। आगे बढ़ने के लिए हम कड़ी मेहनत करते हैं, संघर्ष करते हैं और फिर सफल होकर अपनी अलग पहचान बनाते हैं। हाल ही में एक मखाना उद्योग का मैंने उद्घाटन किया था। कुछ महीनों में ही उसका वॉलमार्ट से एग्रीमेंट हो गया। इस तरह बिहार का मखाना अब पूरी दुनिया में बिकेगा।
मुख्यमंत्री उद्यमिता योजना के तहत 29,828 लाभुकों को दो हजार करोड़ से अधिक की राशि दी जा चुकी है। आज 52 करोड़ की राशि दी गई है। उद्योग विभाग बैंकों के माध्यम से भी उद्यमियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रहा है।
लाभुकों को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री ने कहा कि ऋण कोई रसगुल्ला नहीं है। इसे मिठाई की तरह नहीं खाना है। यह ऋण उद्योग रूपी पौधा लगाने के लिए दिया गया है। इसे लगातार बढ़ाना है। हम सबको गौरवशाली बिहार बनाना है।
उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव संदीप पौंडरीक ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत दी जा रही दस लाख राशि में पांच लाख अनुदान और पांच लाख ऋण है। अपने उद्यम की सफलता के लिए सरकार से प्राप्त राशि का सही उपयोग करें। उन्होंने कहा कि किसी भी उद्योग की सफलता के लिए दस हजार घंटे के फॉर्मूले पर काम करना चाहिए। गुणवत्ता के साथ कभी समझौता नहीं करें।
कार्यशाला में चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ राणा सिंह ने उद्यमियों को मार्केटिंग के गुर बताये। युवा उद्यमियों को एसबीआई के अधिकारियों ने बैंकिंग एवं वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों ने जीएसटी की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के छह लाभुकों ने अपने अनुभव साझा किये। अरुण प्रकाश ने ऑर्गेनिक साबुन और शैंपू के क्षेत्र में किये गये काम को बताया। युवा उद्यमी मिताली गुप्ता ने बताया कि मैंने सेनेटरी पैड और नेपकीन बनाने का काम शुरू किया है। उनका कारोबार हर महीने दो से तीन लाख रुपये का हो गया है।
कार्यशाला में उद्योग निदेशक पंकज दीक्षित, तकनीकी विकास निदेशक संजीव कुमार, हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय के निदेशक विवेक रंजन मैत्रेय, विशेष सचिव दिलीप कुमार एवं आलोक कुमार ने भी अपने विचारों को रखा।