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कर्तव्य का प्रतीक ’सेंगोल’ नये संसद भवन में स्थापित

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नये संसद भवन को राष्ट्र को समर्पित किया। इससे पहले नये भवन में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के समीप पवित्र सेंगोल (राजदंड) को प्रधानमंत्री ने स्थापित किया। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर सेंगोल की पूजा की।

प्रधानमंत्री ने पवित्र सेंगोल की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि चोल साम्राज्य में सेंगोल को सेवा और कर्तव्य के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। यह हमारा सौभाग्य है कि हम इस पवित्र सेंगोल की गरिमा को बहाल कर सके। जब भी इस संसद भवन में कार्यवाही शुरू होगी। सेंगोल हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के साथ लोकतंत्र की जननी भी है। भारत ने वैशाली (बिहार) में गणतंत्र को जीया है और उसकी अनुभूति की है। वेदों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यह हमें लोकतांत्रिक सभाओं और समितियों के सिद्धांतों का पाठ पढ़ाता है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि नया संसद भवन केवल एक भवन नहीं है बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है। नया भवन प्राचीन और आधुनिक के सह अस्तित्व का उदाहरण है। संसद भवन योजना को वास्तविकता से, नीति को कार्यान्वयन से, इच्छाशक्ति को निष्पादन से और संकल्प को सिद्धि से जोड़ता है। यह स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने का माध्यम बनेगा।

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, केंद्रीय मंत्री, सांसद एवं गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।


 


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