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पौधारोपण लक्ष्य के लिए लोगों को अधिक संख्या में जोड़ें

पटना। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों से कहा कि पौधारोपण के लिए बनी योजना को ठीक ढंग से कार्यान्वित करें। जिलों में पौधारोपण गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक लोगों को जोड़ें और पौधारोपण के लक्ष्य को प्राप्त करें। इस काम में तेजी लाने की जरूरत है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो पौधे पहले से लगाए गए हैं। उनकी देखभाल के लिए सभी जरूरी उपाय करें। पहाड़ी क्षेत्र के निचले भागों में जल संग्रहण के लिए बनी जगहों पर भी पौधारोपण कराएं। सरकारी कार्यालय परिसर, सड़क, नहर एवं नदी के किनारे भी पौधारोपण होना चाहिए। 

बिहार से झारखंड के अलग होने के बाद राज्य का हरित आवरण क्षेत्र नौ प्रतिशत रह गया था। वर्ष 2012 में हरियाली मिशन शुरू किया गया। 24 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य था, जिसमें 22 करोड़ पौधे लगाए गए। बड़ी संख्या में पौधारोपण होने से राज्य का हरित आवरण क्षेत्र 15 प्रतिशत तक पहुंच गया। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित आवरण क्षेत्र कम से कम 17 प्रतिशत हो जाए। इसके लिए तेजी से पौधारोपण कराने की जरूरत है। वर्ष 2019 में जल-जीवन-हरियाली अभियान शुरू किया गया। हरियाली को बढ़ावा देने एवं जल संरक्षण के लिए योजनाबद्ध ढंग से काम किये जा रहे हैं। राजगीर, गया और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में पौधारोपण के लिए बीज डाले गए, जिससे वहां वृक्षों की संख्या बढ़ी है। क्षेत्र हरा-भरा दिखता है। 

उन्होंने कहा कि बिहार में इको-टूरिज्म के विकास के लिए कई कार्य किए गए हैं। कई आकर्षक स्थलों को पर्यटक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव अरविंद कुमार चौधरी एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) सीपी खंडूजा ने अभियान की विस्तृत जानकारी दी। 

बैठक में वित्त मंत्री, मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, सीएम के प्रधान सचिव, जीविका के सीईओ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक आशुतोष एवं अन्य वरीय अधिकारी मौजूद थे।
 


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