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बीजेपी नेताओं पर लाठीचार्ज की न्यायिक जांच होनी चाहिए : समिति

बीजेपी केंद्रीय समिति ने निर्णय लिया है कि 13 जुलाई को बिहार विधानसभा मार्च के दौरान बीजेपी नेताओं पर पुलिस लाठीचार्ज की न्यायिक जांच होनी चाहिए। चार सदस्यीय समिति ने पटना पहुंचकर पूरे मामले की जांच की। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास समिति के संयोजक हैं। सांसद मनोज तिवारी, सांसद सुनीता दुग्गल एवं सांसद बीडी राम समिति के सदस्य हैं। 

रघुवर दास ने घायल लोगों से मिलने और घटना स्थल का दौरा करने के बाद कहा कि यह घटना प्रायोजित हिंसा है। घायलों से मिलने के बाद हमलोगों ने महसूस किया कि यह राजनीतिक मुद्दे पर शांतिपूर्ण मार्च था। राज्य सरकार ने प्रायोजित हिंसा करवाई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण और दर्दनाक है। 

उन्होंने कहा कि यह एक सोची समझी साजिश थी। इसकी निंदा की जानी चाहिए। आंसू गैस में मिर्ची पाउडर डाले गए। बर्बरता का आलम था कि विजय सिंह जैसे साथी की मौत हो गई। महिला समेत एक हजार लोग घायल हो गए। इनमें तीन सौ गंभीर हैं। यह घटना जेपी आंदोलन की याद दिलाती है।

भाजपा ने जब विधानसभा मार्च की इजाजत मांगी थी तब प्रशासन ने रूट मांगा था। जब दिया गया, तो उसे स्वीकार कर लिया गया। बाद में प्रशासन के लोगों ने मार्च के दौरान रूट को बदल दिया। 

समिति के सदस्य मनोज तिवारी ने कहा कि लगभग 770 लोगों की कमर के ऊपर लाठियां चली हैं। अधिकतर को सिर पर गंभीर चोट लगी है। मन में आशंका होती है कि जिस तरह लाठियां चलाई गईं, कहीं वे पुलिस की वर्दी में गुंडे तो नहीं थे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन को रोकने के लिए पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यहां सबसे अंत में वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ।

समिति की सदस्य सुनीता दुग्गल का कहना है महिलाओं पर जिस तरह पुलिसकर्मियों ने लाठियां बरसाई। उसे सभ्य समाज स्वीकार नहीं करेगा। घायल महिलाओं से बात करने पर साफ हुआ कि उनकी छातियों पर वार किया गया। एक महिला नेता की पसली टूट गई, एक महिला साथी के सिर में गंभीर चोट है। कई बहन एवं बेटियों की पीठ डंडे की मार से नीले पड़े गए हैं। 

सुनीता दुग्गल ने कहा कि क्या इस सरकार में महिलाओं के साथ ऐसा ही व्यवहार होता है। प्रदर्शन या रैली में लोगों को रोकने का एक नियम होता है, लेकिन सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया। समिति इस निर्णय पर पहुंची है कि इस घटना कि न्यायिक जांच होनी चाहिए। 

पटना के एसएसपी रहे और समिति के सदस्य बीडी राम ने कहा कि पुलिस अधिकारी होने के नाते मुझे मालूम है कि प्रदर्शन एवं रैली को रोकने के लिए कम से कम शक्ति का प्रयोग करने का नियम है। वीडियो फुटेज और घायल लोगों को देखने से साफ पता चलता है कि इस नियम का पालन नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि अधिकतर लोगों की पीठ और सिर पर जख्म हैं। इसका प्रमाण है कि बर्बरता की यह पराकाष्ठा है। इस घटना के लिए पुलिस बल को आत्ममंथन करना चाहिए। 


 


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