बिहार में जाति आधारित गणना को पटना हाईकोर्ट से हरी झंडी मिल गई है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य में जातीय गणना का काम फिर से शुरू हो जाएगा। चार मई, 2023 को जातीय गणना के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस पर अंतरिम रोक लगा दी थी। गणना का काम सात जनवरी, 2023 से शुरू हुआ था। कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ता का कहना है कि अब वे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
चीफ जस्टिस कृष्णन विनोद चंद्रन एवं जस्टिस पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने इस मामले पर जुलाई माह में लगातार पांच दिनों तक सुनवाई की। याचिकाकर्ता और बिहार सरकार की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने 7 जुलाई, 2023 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
एक अगस्त, 2023 को पटना हाईकोर्ट नेे अपना आदेश जारी किया। अदालत ने जातीय गणना के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया और इसे सर्वे की तरह कराने की मंजूरी दे दी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि जनगणना कराने का काम केंद्र सरकार का है। फिर राज्य सरकार की ओर से जाति गणना कराने का क्या औचित्य है। इस पर जनता का पांच सौ करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। इसके लिए राज्य सरकार ने कोई कानून भी नहीं बनाया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को जानकारी दी गई कि जनकल्याण की योजना बनाने के लिए यह गणना हो रही है। इससे कोई गोपनीयता भंग नहीं होगी। इसके लिए बजट का प्रावधान किया गया है।