बिहार की लीची एवं भागलपुर कतरनी चावल उत्पादक समूहों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली में सम्मानित किया। उत्पादक समूहों को पुुरस्कार में दस लाख एवं व्यक्तिगत किसानों को एक-एक लाख राशि दी गई।
सम्मान समारोह का आयोजन किसानों के अधिकारों पर आयोजित चार दिवसीय वैश्विक संगोष्ठी के मौके पर किया गया। संगोष्ठी का उद्घाटन राष्ट्रपति ने किया। इस अवसर पर विभिन्न श्रेणियों में 26 पुरस्कार किसान एवं संगठनों को दिये गये। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एवं बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक भी समारोह में मौजूद थे।
व्यक्तिगत किसानों में बिहार के जमुई से अर्जुन मंडल को औषधीय पौधों की खेती, मुंगेर के सत्यदेव सिंह को चना एवं तीसी, रोहतास जिले से दिलीप कुमार सिंह को बैगन, टमाटर, करेला एवं धनिया और अर्जुन सिंह को चावल, हल्दी एवं लौकी के संरक्षण के लिए पुरस्कृत किया गया।
इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि सभ्यता की शुरुआत से ही हमारे किसान असली इंजीनियर एवं वैज्ञानिक हैं। इन्होंने मानवता के लाभ के लिए प्रकृति की ऊर्जा एवं उदारता का उपयोग किया है। एक नोबेल पुरस्कार विजेता एवं अर्थशास्त्री ने बिहार के एक गांव का दौरा करते समय टिप्पणी की थी भारतीय किसान, वैज्ञानिकों से बेहतर हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूं क्योंकि कृषि में हमने परंपरा को प्रौद्योगिकी के साथ सहजता से मिश्रित किया है। हमने कई पौधों की प्रजातियों को खो दिया है। इसके बावजूद किसानों के प्रयास सराहनीय हैं। इनका अस्तित्व हम सबके लिए महत्वपूर्ण है।
बिहार कृषि विभाग के सचिव संजय अग्रवाल ने सम्मानित किसानों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग हमेशा उनके अधिकार और सम्मान को आगे बढ़ाता रहेगा।