प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एवं भारत में हरित क्रांति के जनक डॉ एमएस स्वामीनाथन का निधन हो गया। वह 98 वर्ष के थे। चेन्नई स्थित अपने आवास में उन्होंने अंतिम सांस ली। कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ स्वामीनाथन को पद्म श्री, पद्म भूषण एवं पद्म भूषण सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।
1960 के दशक में भारत अनाज की कमी से जूझ रहा था। डॉ स्वामीनाथन ने अमेरिकी वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग और कई वैज्ञानिकों के साथ मिलकर गेहूं की उच्च पैदावार वाली किस्म का बीज विकसित किया था। इससे भारत खाद्यान्न मामले में आत्मनिर्भर बन गया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महान कृषि वैज्ञानिक के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि डॉ स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का पिता भी कहा जाता है। देश के नाजुक वक्त में उन्होंने कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किये, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ स्वामीनाथन की सराहना सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया भर में होती रही है। उनका निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है।