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खाड़ी देशों में बिहार के केले की मांग, अन्य देशों में भी अवसर

बिहार के केले की मांग खाड़ी देशों में है। यूएई, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, कतर और नेपाल में केला का निर्यात किया जाता है। अन्य देशों में भी निर्यात की काफी संभावनाएं हैं। इसके लिए बिहार सरकार केले के उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टीक और मार्केटिंग के लिए सहायता दे रही है। कृषि विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने यह जानकारी दी।

कृषि भवन में एक दिवसीय केला प्रदर्शनी पर आयोजित कार्यक्रम को संजय अग्रवाल संबोधित कर रहे थे। कृषि विभाग की नई पहल वन मंथ, वन क्रॉप के तहत पहली बार केला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। केला क्षेत्र में चुनौती एवं अवसर विषय पर उत्पादक एवं उद्यमियों के साथ परिचर्चा भी हुई। 

बिहार के 12 जिलों वैशाली, भागलपुर, सारण, समस्तीपुर, कटिहार, मधेपुरा, खगड़िया, पूर्णियां, गोपालगंज, किशनगंज, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण जिलों में केले की खेती होती है। इन जिलों में केले की चीनिया, मालभोग, जी-9, अल्पान, बतीशा, रोबस्टा, दवॉर्फ केवेंडिश एवं मुठिया प्रजाति की खेती होती है।

कृषि सचिव ने बताया कि वर्तमान में केला का उत्पादन बिहार में लगभग 19 लाख मीट्रिक टन है। प्रति हेक्टेयर उत्पादन लगभग 45 मीट्रिक टन है। केले के उत्पादन में बिहार का योगदान पूरे देश में छह प्रतिशत है। केला का उत्पादन बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं। अगले वर्ष 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती की जायेगी।

किसानों को केले की रोपण सामग्री के साथ तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराने के लिए वैशाली जिले के गोरौल में केला अनुसंधान संस्थान की स्थापना 2017 में की गई। इसी संस्थान में टिश्यूकल्चर प्रयोगशाला भी है। कार्यक्रम में केला उत्पादक किसान, कृषि निदेशक डॉ आलोक रंजन घोष, उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार, विभाग के अधिकारी एवं उद्यमी उपस्थित थे।
 


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