राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बिहार को विकसित राज्य बनाने के लिए समेकित विकास के अलावा कोई विकल्प नहीं है। राज्य के नीति निर्माताओं और जनता को बिहार की प्रगति के लिए एक रोड मैप निर्धारित कर उस पर चलना होगा।
पटना में चौथे कृषि रोड मैप (2023-2028) के शुभारंभ के मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत के सपने को पूरा करने में इस प्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान होगा, लेकिन इस सपने को सच्चाई में बदलने के लिए हमें मानव निर्मित संकीर्णताओं से बाहर निकलना होगा।
यह खुशी की बात है कि कृषि रोड मैप का क्रियान्वयन हो रहा है। मुझे और अधिक खुशी होगी जब बिहार विकास के हर मानक पर रोड मैप बनाकर लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़े। चाहे वह स्वास्थ्य का क्षेत्र हो, शिक्षा हो, प्रति व्यक्ति आय हो या सबसे बढ़कर हैप्पीनेस इंडेक्स।

बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में बिहार की यह मेरी पहली यात्रा है, लेकिन मैं बिहार के लोगों और यहां की संस्कृति से परिचित हूं। झारखंड के राज्यपाल के दौरान मैंने बिहार की संस्कृति और जीवनशैली को करीब से महसूस किया है।
मेरा गृह राज्य ओडिशा भी ऐतिहासिक रूप से बिहार से जुड़ा हुआ है। इसलिए मुझे लगता है कि मैं भी अपने आप को बिहारी कह सकती हूं। राष्ट्रपति कार्यकाल के बाद अपने गांव जाकर मुझे खेती करनी है।
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि कृषि बिहार की लोक संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। साथ ही बिहार की अर्थव्यवस्था का मूल आधार है। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र राज्य के लगभग आधे कार्यबल को रोजगार देते हैं। राज्य की जीडीपी में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए कृषि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास बहुत जरूरी है।

बिहार सरकार 2008 से कृषि रोड मैप लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन कृषि रोड मैप लागू होने का ही परिणाम है कि राज्य में धान, गेहूं और मक्का की उत्पादकता बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई है।
मशरूम,शहद,मखाना और मछली के उत्पादन में भी बिहार अन्य राज्यों से काफी आगे है। चौथे कृषि रोड मैप का शुभारंभ एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे इन प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव एवं कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत ने भी संबोधित किया।