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सामाजिक समानता और एकता विकास में सहायक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मोतिहारी में कहा कि सामाजिक समानता और एकता का रास्ता देशवासियों को आधुनिक विकास के रास्ते पर आगे ले जाएगा। इससे भारत एक विकसित देश के रूप में प्रतिष्ठित होगा। 

आज से लगभग 106 साल पहले चंपारण में गांधीजी के कहने पर लोगों ने एकता का रास्ता अपनाया और ब्रिटिश हुकूमत को झुकने पर मजबूर कर दिया। उस आंदोलन के दौरान सभी लोग जातिगत भेदभाव को भूल एक-दूसरे के साथ खाना बनाने और खाने लगे।

राष्ट्रपति बिहार दौरे के दूसरे दिन मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि गांधीजी की विरासत को समझने के लिए सादगी और सच्चाई के अच्छे परिणामों को समझना होगा। 

सादगी और सच्चाई का मार्ग ही वास्तविक सुख, शांति और प्रसिद्धि का मार्ग है। उन्होंने विद्यार्थियों से बापू की शिक्षाओं के अनुसार सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी यह मानते थे कि छात्राओं और छात्रों को शिक्षा के समान अवसर मिलने चाहिए। वे कहते थे कि यदि जरूरत पड़े तो छात्राओं की शिक्षा के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए। 

गांधीजी के इस विचार को इस विश्वविद्यालय से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को सदैव ध्यान में रखना चाहिए। बापू ने यह भी कहा था कि विश्वविद्यालय की शिक्षा का उद्देश्य ऐसे सच्चे जनसेवकों को तैयार करना है, जो देश के लिए जिए।

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सांसद राधा मोहन सिंह ने भी अपने विचारों को रखा। 


 


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