मुख्य समाचार

विकास के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार में समन्वय जरूरी 

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विकास के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार की जनसंख्या विकास का सबसे बड़ा संसाधन बन सकती है। हमें अपनी सोच बदलने की जरूरत है। 

बिहार में पर्यटन एवं पर्यटन आधारित उद्योगों के विकास की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन हम पर्यटन मानचित्र पर भी पिछड़े हैं। इस पर भी चिंतन होना चाहिए। हमें पर्यटक की सुविधाओं का ख्याल रखना होगा। बिहार के उत्पादों की ब्रांडिंग पर भी विशेष ध्यान देना होगा। 

राज्यपाल बिहार उद्योग संघ (बीआईए) के वार्षिक समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने के कारण बिहार के औद्योगीकरण में कृषि आधारित उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। 

बिहार की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी गांव में रहती है। शहरों के विकास की चिंता में गांव का विकास प्रभावित हो सकता है। हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि शहरों में उपलब्ध सुविधाएं गांवों तक पहुंचायी जाए। गांव में ही रोजगार के साधन उपलब्ध हो। यह कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना से ही संभव है। 

उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों और औद्योगीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि पहले बिहार औद्योगिक रूप से काफी विकसित था, लेकिन कई कारणों से राज्य का औद्योगीकरण प्रभावित होता गया। 

हमारी पहचान एक उपभोक्ता राज्य के रूप में रह गयी है, लेकिन राज्य सरकार औद्योगीकरण की गति को तेज करने की दिशा में काफी प्रयत्नशील है। नये निवेश भी आ रहे हैं।

बीआईए के अध्यक्ष के.पी.एस.केशरी ने राज्य के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास से जुड़े पहलुओं पर अपने विचारों को रखा। इस मौके पर बीआईए के सदस्य, बैंक एवं वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे।   


 


संबंधित खबरें