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बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की फिर उठी मांग

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध करने का प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में पारित किया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया कि बिहार के लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार बिहार को शीघ्र विशेष राज्य का दर्जा दे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग वर्ष 2010 से ही कर रहे हैं। इसके लिए 4 नवंबर, 2012 को पटना के गांधी मैदान और 17 मार्च, 2013 को दिल्ली के रामलीला मैदान में अधिकार रैली हुई थी। 

हमारी मांग पर तत्कालीन केंद्र सरकार ने रघुराम राजन कमेटी भी बनाई थी। इसकी रिपोर्ट सितंबर, 2013 में प्रकाशित हुई, लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकार ने कुछ नहीं किया। मई, 2017 में भी विशेष राज्य का दर्जा के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। 

बिहार की जाति आधारित गणना में सभी वर्गों से लगभग 94 लाख गरीब परिवार की पहचान हुई है। उन सभी परिवार के एक सदस्य को रोजगार के लिए दो लाख रुपये तक की राशि किश्तों में उपलब्ध करायी जायेगी। 

63,850 आवासहीन एवं भूमिहीन परिवारों को जमीन क्रय के लिए दी जा रही 60 हजार रुपये की राशि की सीमा बढ़ाकर एक लाख रुपये की गई है। साथ ही इन परिवारों को मकान बनाने के लिए 1 लाख 20 हजार राशि भी दी जाएगी। 

39 लाख परिवार झोपड़ियों में रह रहे हैं। उन्हें भी पक्का मकान दिया जायेगा। इसके लिए प्रति परिवार 1 लाख 20 हजार रुपये की दर से राशि उपलब्ध करायी जायेगी। सतत् जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत अत्यंत निर्धन परिवारों की सहायता के लिए एक लाख की जगह दो लाख राशि दी जायेगी। 

इन योजनाओं के क्रियान्वयन में लगभग 2 लाख 50 हजार करोड़ राशि खर्च होगी। इन कामों के लिए बड़ी राशि की जरूरत होगी, जिसे पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाये तो इस काम को बहुत कम समय में पूरा कर लेंगे। 
 


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