बिहार में सरकारी नौकरी एवं शैक्षणिक संस्थानों के दाखिले में आरक्षण की सीमा 60 से 75 प्रतिशत करने को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि संविधान में आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए की गयी थी न कि जनसंख्या के अनुपात में।
याचिकाकर्ता का कहना है कि बिहार आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसलिए इसकी समीक्षा होनी चाहिए। इस मामले की लिस्टिंग से पहले एडवोकेट जनरल को याचिका की कॉपी भेजी गई है।

आरक्षण (संशोधन) विधेयक 10 नवंबर, 2023 को बिहार विधान मंडल से पास हुआ था। इसके बाद 21 नवंबर, 2023 को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी।
नई आरक्षण नीति के तहत अतिपिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लिए आरक्षण की सीमा 18 से बढ़कर 25 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग (बीसी) के लिए 12 से बढ़कर 18, अनुसूचित जाति (एससी) की सीमा 16 से बढ़कर 20 एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सीमा एक से बढ़कर दो प्रतिशत हो गई है।
केंद्र सरकार के प्रावधान के तहत आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलता रहेगा। पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए तीन फीसदी आरक्षण को उसी वर्ग के आरक्षण में समाहित कर दिया गया है।