बिहार ऐतिहासिक राज्य है। लगातार विकास के बावजूद बिहार विकास के मापदंडों में राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है। बिहार विशेष राज्य के दर्जे की सभी शर्तों को पूरा करता है। अब तो जाति आधारित गणना में गरीबी एवं पिछड़ेपन के आंकड़े भी इसका समर्थन करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि गृह मंत्री जी, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की पहल करेंगे।
26वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद् की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ये बातें कहीं। बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री सचिवालय में हुई। लगभग तीन घंटे तक चली बैठक में बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हम वर्ष 2010 से ही बिहार के लिए विशेष राज्य का दर्जा की मांग कर रहे हैं। जाति आधारित गणना में लोगों की आर्थिक स्थिति की भी जानकारी ली गई है। सभी जाति में गरीब परिवार मिले हैं।
इनमें सामान्य वर्ग के 25.09 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग के 33.16, अति पिछड़ा वर्ग के 33.58, अनुसूचित जाति के 42.93 प्रतिशत एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 42.70 प्रतिशत गरीब हैं। सभी वर्गों में गरीब परिवार की कुल संख्या 94 लाख है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाये, तो गरीबों के कल्याण के लिए बनी योजना का काम हम बहुत कम समय में पूरा कर लेंगे।

हर गरीब परिवार से एक सदस्य को रोजगार देने के लिए दो लाख रुपये तक की योजना है। जिन परिवारों के पास घर नहीं है, उनके लिए जमीन खरीदने की राशि 60 हजार से एक लाख रुपये कर दी गई है।
मकान बनाने के लिए 1.20 लाख रुपये दिये जायेंगे। सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत अत्यंत निर्धन परिवार को रोजगार के लिए एक लाख रुपये की सहायता राशि बढ़ाकर दो लाख कर दी गई है। इन सब कार्यों में 2 लाख 50 हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इसे अगले पांच साल में पूरा कर लिया जायेगा।
बैठक में बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, राज्य सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी एवं संजय कुमार झा, पश्चिम बंगाल से मंत्री चंद्रमा भट्टाचार्य, उड़ीसा से मंत्री प्रदीप कुमार आम्त एवं तुषार कांति बेहरा, झारखंड से मंत्री रामेश्वर उरांव एवं चंपई सोरेन, केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।