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ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है सोनपुर मेला 

सोनपुर मेला केवल प्राचीन परंपरा का प्रतीक नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी आधार है। हजारों छोटे व्यापारी एवं कारीगर यहां आकर कलात्मक एवं सजावटी सामान, पारंपरिक गहने, बर्तन एवं कपड़े की बिक्री करते हैं। यह मेला स्थानीय उत्पादों को देशभर के बाजार तक पहुंचाने का माध्यम बन चुका है।

सोनपुर मेले का जायजा लेने के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने विचारों को रखा। उन्होंने कहा कि हमलोग सबकी सुविधाओं का ख्याल रख रहे हैं। साथ ही छोटे व्यापारी एवं कारीगरों की तरक्की के लिए भी काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न उत्पादों के संबंध में जानकारी ली। विक्रेताओं ने उत्पाद के निर्माण एवं लोगों तक पहुंच के लिए राज्य सरकार से मिल रही सहायता के लिए आभार व्यक्त किया। सीएम ने आपदा प्रबंधन विभाग, आर्ट एंड क्राफ्ट ग्राम, महिला एवं बाल विकास निगम, जीविका समेत कई विभागों की प्रदर्शनी को भी देखा। 

सोनपुर मेले का आयोजन सारण जिला के सोनपुर में प्रत्येक वर्ष होता है। यह मेला कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होकर एक महीने तक चलता है। 

गंगा और गंडक नदी के किनारे हजारों साल से इस मेले का आयोजन होता रहा है। बड़ी संख्या में आनेवाले श्रद्धालु नदी में स्नान कर यहां स्थित हरिहरनाथ मंदिर में पूजा करते हैं। इसलिए इसे हरिहर क्षेत्र मेला भी कहा जाता है। स्थानीय लोगों में यह छत्तर मेला के नाम से भी प्रसिद्ध है। 

सोनपुर मेला देश के सबसे बड़े पशु मेला के रूप में भी प्रसिद्ध है। लोगों के मनोरंजन के लिए प्रतिदिन खेल,प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। 
 


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