बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुने जाने के बाद प्रेम कुमार ने सदन में अपने विचारों को रखा। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के आसन पर रहते हुए मेरे लिए सरकार और विपक्ष दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण होंगे। हमारा एक ही उद्देश्य है बिहार की जनता की प्रगति और उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति।
अध्यक्ष के रूप में मेरा कर्तव्य होगा कि संविधान एवं सदन के संचालन संबंधी नियमों का पालन करते हुए प्रत्येक सदस्य को उसके अधिकार और सम्मान के साथ अपने विचार रखने का अवसर मिले।

मुझे विश्वास है कि इस सदन में वाद-विवाद का फलाफल बिहार के भविष्य को अधिक उज्ज्वल बनाने में सहायक होगा। महात्मा गांधी ने कहा था, भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज क्या करते हैं।

प्रेम कुमार ने कहा कि सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना जाना मेरे लिए गौरव का विषय है, लेकिन इससे कहीं अधिक यह उत्तरदायित्व का संकेत है। लोकतंत्र की सुंदरता इसी में है कि विविध विचारधाराएं एक ही टेबल पर बैठकर राज्य के विकास के लिए सार्थक चर्चा करें।
जनता की इच्छा है कि बिहार तेजी से विकसित हो और विधायिका का प्रत्येक निर्णय जनता के जीवन को सहज, सुरक्षित और समृद्ध बनाए।

विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से कहा कि आज का यह क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। 18वीं विधानसभा नई ऊर्जा और नए संकल्पों के साथ शुरू हो रही है। परंपराएं हमें गरिमा देती हैं और नवाचार हमें दिशा।
जरूरी है कि दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए हम ऐसा कार्यकाल रचें, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय हो। विचारों का टकराव स्वाभाविक है, लेकिन मन और तन का संघर्ष नहीं होना चाहिए। यह हम सबका सौभाग्य है कि हमें जनता की सेवा का अवसर मिला है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था- केवल वे ही जीवित रहते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं।