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आयकरदाता की सुविधा के लिए दोनों व्यवस्थाओं का विकल्प : सीतारमण

नई दिल्ली । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि करदाता अचानक किसी दबाव में नहीं पड़े। इसलिए नई व्यवस्था को वैकल्पिक रखा गया है। आम बजट पेश करने के एक दिन बाद रविवार को वे मीडिया प्रतिनिधियों से विशेष चर्चा कर रही थीं। 

विशेष चर्चा में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने कर ढांचे को सरल बनाने का कदम उठाया है। अचानक होने वाले बदलाव से करदाता दबाव में नहीं आये और उन्हें नई प्रणाली को समझने का समय मिले। इसलिये नई और पुरानी दोनों व्यवस्थाओं का विकल्प रखा गया है। 

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री ने बजट 2020-21 में व्यक्तिगत आयकर की सात स्लैब वाली नई व्यवस्था की घोषणा की है। वित्त मंत्री ने इसमें करदाताओं पर कर बोझ कम होने का दावा किया है। हालांकि नई व्यवस्था में कई तरह की कर रियायत और छूट को समाप्त कर दिया गया है। 

करदाता चार्टर : वित्त मंत्री ने कहा कि करदाता का भरोसा कायम रखने के लिये सरकार ने करदाता अधिकार घोषणा पत्र (करदाता चार्टर) लाने की घोषणा की है। कई उपायों के बावजूद करदाताओं को परेशान करने की शिकायतों के कारण करदाता अधिकार पत्र की बात की गई है। 

डीआईएन के बिना नोटिस मान्य नहीं : कोई भी कर अधिकारी यदि किसी करदाता को नोटिस भेजता है, तो उसे नोटिस को पहले उच्च अधिकारियों से जुड़े पोर्टल में डालना होगा। शीर्ष स्तर पर उसे जांचा परखा जायेगा, सही होने पर उसे दस्तावेज पहचान संख्या (डीआईएन) दिया जायेगा। बिना डीआईएन नंबर के कोई भी कर नोटिस मान्य नहीं होगा। बिना नंबर के नोटिस को करदाता अवैध मानकर कूड़ेदान में डाल सकते हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में करदाता की क्षमता की तकनीकी रूप से जानकारी नहीं मिल पाती है। आयकर कानून में अब तक 120 रियायतें जुड़ गईं हैं। करदाता इस पूरी सूची में अपनी सहूलियत के मुताबिक रियायत को तलाशते हैं। बचत करने से किसी को रोका नहीं जायेगा। आप खर्च कीजिये या बचत कीजिए। यह पूरी तरह आपके विवेक पर है, लेकिन पूरी व्यवस्था में सुधार लाने के बारे में सोचना होगा। 
 


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