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आयकर विभाग ने लोहा कारोबारी के ठिकानों पर की छापेमारी

पटना/रांची/नई दिल्ली। आयकर विभाग ने झारखंड में लोहा कारोबार से जुड़े एक समूह के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान बिना हिसाब के 3.07 करोड़ नगद, 1.28 करोड़ रुपए के आभूषण और शेयर जब्त किए गए। यह समूह स्पंज आयरन, इंगोट्स, एमएस रॉड्स और टीएमटी बार के उत्पादन से जुड़ा है। 

कारोबारी के पास पेट्रोल पंप की भी डीलरशिप है। छापेमारी अभियान में 20 ठिकानों की जांच की गई। अभियान 17 मार्च से 20 मार्च तक जारी रहा। आगे की जांच अभी भी जारी है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा है कि कंपनी बेहिसाबी बिक्री और उत्पादन में संलिप्त पायी गई है और अपने मुनाफे को खर्च के रूप में दिखाने के लिए फर्जी कंपनियों के बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल करती रही है। प्राथमिक जांच में 185 करोड़ रुपए के बेहिसाबी उत्पादन की बिक्री के प्रमाण मिले हैं। लेन-देन का ब्योरा डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध था। 

यह समूह पूर्वी भारत में बड़े पैमाने पर अपने उत्पाद की नकद आधार पर बेहिसाब बिक्री करता रहा है। ऐसी बेहिसाब बिक्री से प्राप्त होने वाले धन को कोलकाता स्थित फर्जी कंपनियों के माध्यम से शेयर पूंजी और असुरक्षित ऋण के रूप में समूह में शामिल करता रहा है। इन पैसों का संपत्तियों की खरीद और व्यक्तिगत उपयोग वाली महंगी वस्तुओं की खरीद में निवेश के रूप में भी किया गया।

जब्त दस्तावेज से जानकारी मिली है कि बेहिसाब बिक्री से प्राप्त समूह की लगभग 100 करोड़ रुपए की पूंजी को कोलकाता स्थित शैल कंपनी के माध्यम से ऊंची दर पर शेयर के रूप में वापस समूह में लाया गया। नकली कंपनियों के लिए जारी शेयर के मूल प्रमाणपत्र भी कंपनी के परिसरों से प्राप्त हुए हैं। यह भी जानकारी मिली कि तथाकथित शेयर धारक अस्तित्व में हैं ही नहीं।

समूह ने फर्जी कंपनियों से लगभग 25 करोड़ रुपए का असुरक्षित ऋण भी दर्शाया है। यह साफ संकेत करता है कि समूह अपनी ही आय को कंपनी में वापस लाने के लिए इन रास्तों को अपनाता रहा है। समूह ने 30 करोड़ रुपए की फर्जी कमोडिटी प्रोफिट प्रविष्टियां भी प्राप्त की है।

छापेमारी में यह खुलासा हुआ है कि समूह नकदी आय जुटाने में सक्रिय रूप से संलिप्त  है और उसी नकदी को इक्विटी और ऋण के माध्यम से समूह में शामिल कर उसे रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश करता रहा है। 
 


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