पटना। राज्यसभा सांसद एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि बिहार सहित अन्य राज्यों की राजस्व स्थिति को देखते हुए पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरा में लाना अभी उचित नहीं होगा। जीएसटी काउंसिल जब इस मुद्दे पर 17 सितंबर को केरल हाइकोर्ट के निर्देश पर विचार करने वाली है, तब राज्यों को अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए।
यदि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया गया, तो इन वस्तुओं पर टैक्स 75 से घटाकर 28 फीसदी करना होगा। इससे केंद्र और राज्य सरकारों को 4.10 लाख करोड़ के राजस्व से वंचित होना पड़ेगा। इसमें डीजल से 1.10 लाख करोड़ और पेट्रोल से तीन लाख करोड़ की राजस्व हानि होगी। कोविड काल में सरकार इतनी बड़ी राशि की भरपाई नहीं कर पाएगी और विकास कार्य प्रभावित होंगे।
60 करोड़ लोगों का टीकाकरण, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन और अर्थव्यवस्था को कुछ बड़े राहत पैकेज देने जैसे फैसलों से राजस्व संसाधन पर दबाव बढा है। इसे ध्यान में रखते हुए पेट्रोल-डीजल को जीएसटी दायरे में लाने का विचार टालना ही उचित होगा।