मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अंगदान के क्षेत्र में दधीचि देहदान समिति के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में दधीचि देहदान समिति को एक सहयोगी के रूप में जोड़ने की पहल होगी। जिला और अनुमंडल अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेजों में समिति के माध्यम से लोगों को अंगदान के लिए जागरूक किया जाएगा।
मुख्यमंत्री चौथे राष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स परिसर में किया गया। असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने उनका अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में अंगदान के प्रति लोगों को जानकारी है, लेकिन लोग आगे नहीं आते हैं। मृत्यु के समय परिवार भावुक होता है। उस समय निर्णय लेना कठिन होता है। इसलिए लोगों को अंगदान के लिए पहले से जागरूक करना होगा। किडनी दान से किसी को नया जीवन मिल सकता है और नेत्रदान से किसी के जीवन में उजाला आ सकता है।
सीएम ने दधीचि देहदान समिति से जुड़े बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी को याद किया। सीएम ने बताया कि लंबे समय तक उनके मार्गदर्शन में अंगदान के क्षेत्र में काम हुआ। उनका योगदान स्मरणीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंगदान के क्षेत्र में किसी कानून में बदलाव की जरूरत होने पर सरकार समिति के साथ बैठकर आवश्यक पहल करेगी। निजी अस्पतालों में भी अंगदान के लिए जागरूकता अभियान पर काम होगा।
दधीचि देहदान समिति का अभियान केवल सरकार को सहयोग देने का नहीं, बल्कि पूरे बिहार की मानवता की सेवा का अभियान है। सरकार इस अभियान का पूरा लाभ उठाना चाहती है। सरकार का उद्देश्य है कि अंगदान के माध्यम से जरूरतमंद लोगों के जीवन में खुशहाली आए।
अंगदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए मुख्यमंत्री ने महाधिवक्ता एसडी संजय, विधायक संजीव चौरसिया, महापौर सीता साहू और आईजीआईएमएस के उपनिदेशक डॉ विभूति प्रसन्न सिन्हा समेत कई लोगों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल सह दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष गंगा प्रसाद, बीजेपी के संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया, समिति के वरीय उपाध्यक्ष डॉ सुभाष प्रसाद, पद्मश्री निलेश मांडलेवाला, समिति के महासचिव पद्मश्री बिमल जैन, प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ अनिल गुप्ता, विधायक श्याम रजक एवं संजय गुप्ता, समिति के सदस्य और अंगदाता के परिजन उपस्थित थे।