बिहार सरकार खेती को और अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार नई संभावनाओं पर काम कर रही है। अब राज्य में पाम ऑयल (Palm oil) की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी चल रही है। पहले चरण में सीमांचल के अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और चंपारण के मोतिहारी एवं बेतिया जिलों में खेती शुरू होगी। दोनों क्षेत्र की जलवायु पाम ऑयल के अनुकूल है।
भारत वर्तमान में खाद्य तेल की जरूरत का लगभग 57 प्रतिशत आयात करता है। खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से बिहार के उपयुक्त जलवायु वाले जिलों में पाम ऑयल की वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा का कहना है कि राष्ट्रीय खाद्य तेल-पाम ऑयल मिशन (NMEO-OP) योजना का राज्य में विस्तार हो रहा है। पाम ऑयल एक दीर्घकालिक फसल है। इसके माध्यम से किसानों को अतिरिक्त एवं स्थिर आय का अवसर मिल सकता है। इसकी खेती पर विशेष अनुदान की व्यवस्था है।
कृषि मंत्री ने राज्य के किसानों से कहा है कि जहां की जमीन और जलवायु पाम ऑयल की खेती के अनुकूल है, वहां किसान पारंपरिक फसल के साथ इस फसल को भी अपनाने पर विचार करें। राज्य सरकार किसानों को आवश्यक सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।
योजना से जुड़ने के लिए इच्छुक किसान जिला उद्यान कार्यालय और प्रखंड उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त DBT पोर्टल एवं बिहार कृषि ऐप पर भी जानकारी उपलब्ध है।