पटना। मल्टी प्लेक्स एवं सिनेमा हाॅल में टैक्स कम होने के बावजूद टिकट दर में कमी नहीं आ रही है। फिलहाल 18 से 28 फीसदी जीएसटी है। जबकि पहले की कंपाउंडिंग स्कीम में टैक्स अधिक था। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस संबंध में वाणिज्य कर विभाग को सभी मल्टी प्लेक्स एवं सिनेमा हाॅल प्रबंधन सेे जवाब मांगने का निर्देश दिया है। जीएसटी के पीछे सरकार का मकसद बेहतर अर्थव्यवस्था के साथ उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाना भी है। उप मुख्यमंत्री बिहार चैंबर आॅफ काॅमर्स परिसर में जीएसटी से संबंधित कारोबारियों की परेशानी सुन रहे थे।
पाटलिपुत्र सर्राफा संघ के विनोद कुमार ने कहा कि 31 मार्च 2018 तक ई-वे बिल स्थगित है। बावजूद बिहार में यह व्यवस्था लागू है। प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी ने कहा कि यदि ऐसा है, तो इसे शीघ्र दूर किया जाएगा। बिहार महिला उद्योग संघ की पुष्पा चोपड़ा ने कहा कि संघ की अधिकतर महिलाएं हैंडिक्राफ्ट उत्पादों से जुड़ी हैं। सालाना करीब 20 लाख का कारोबार करती हैं। बावजूद सामान मंगाने या भेजने के लिए जीएसटी नंबर मांगा जाता है।
बिल्डर्स एसोसिएशन ने कारोबार से संबंधित कई परेशानियों को बताया। टैैक्स संरचना, निबंधन एवं जमीन के एमवीआर संबंधित बातें रखीं। विभाग ने इसके लिए अलग से मीटिंग करने की बात कही ताकि हर मसले पर चर्चा हो सके। पेपर ट्रेडर्स एसोसिएशन का कहना है कि कुछ आइटम पर टैक्स 12 एवं कुछ पर 18 फीसदी है। 18 फीसदी टैक्स वाले आइटम को 12 फीसदी करने की मांग की। बर्तन उद्योग समिति, परेब ने पीतल उत्पादों पर अलग-अलग टैक्स की बात कही। समिति ने पांच फीसदी जीएसटी करने की मांग रखी।