पटना। सरकार के लिए वाणिज्य-कर विभाग व व्यापारी रीढ़ हैं। राजस्व संग्रह का बड़ा हिस्सा वाणिज्य कर विभाग से आता है। जीएसटी से व्यापारी एवं आमलोगों को काफी फायदा है। इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य हित में जीएसटी का सबसे पहले समर्थन किया। बिहार देश का दूसरा राज्य बना, जिसने जीएसटी बिल को दोनों सदनों से पास कराकर केंद्र को भेजा। ये बातें विधान पार्षद प्रो. रणवीर नंदन ने बिहार चैंबर आॅफ काॅमर्स परिसर में कॉन्फ़ेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के द्वारा जीएसटी, ई-वे बिल व डिजिटल पेमेंट पर आयोजित परिचर्चा में कही।
उन्होंने कहा कि जीएसटी में कुछ दिक्कत है, जिसे अधिकारी व व्यापारी मिल बैठकर दूर कर रहे हैं। जीएसटी के आने से लोगों व व्यापारियों को कई तरह के करों से मुक्ति मिल गयी और एक कर, एक राष्ट्र का सिद्धांत लागू हो गया। बिहार उपभोक्ता प्रमुख राज्य है। यहां जीएसटी से काफी फायदा होगा। वर्तमान में सरकार की बड़ी राशि नोट की छपाई व बांटने में खर्च होती है। इसलिए डिजटल पेमेंट को बढ़ावा देना जरूरी है।
सीएआईटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया ने कहा कि मार्च तक जीएसटी से संबंधित जो परेशानी है, उसका समाधान हो जाएगा। फेडरेशन के प्रयास से व्यापारियों के हित में 177 आइटम पर 28 से 12 फीसदी जीएसटी कराया गया। अभी और आईटम पर राहत के लिए फेडरेशन काम कर रहा है।
सीएआईटी के महासचिव व जीएसटी रिव्यू कमिटी के सदस्य प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारियों को एफडीआई का विरोध करना चाहिए। इसके कई प्रावधानों को हटाने के लिए आंदोलन में एकजुटता की जरूरत है, नहीं तो हमलोग को व्यापार से बाहर आना पड़ेगा। व्यवसायियों को ईमानदारी से कर देना और अपना बैलेंस सीट ठीक रखना चाहिए। ई-वे बिल की जगह क्यू आर कोड को प्रमुखता देनी चाहिए। इससे काफी संकट का समाधान हो जाएगा।
मौके पर फेडरेशन के बिहार संयोजक अशोक वर्मा, बिहार चैंबर आॅफ कामर्स के अध्यक्ष पीके अग्रवाल, रमेश गांधी, वीरेंद्र जालान, सागरिका चौधरी, यूपी व बंगाल के सचिव पंकज अरोड़ा व रविशंकर राय, अनूप कृष्णा, मुकेश जैन, अमृता सिंह, पल्लवी सिन्हा, सौरभ कुमार व पंकज कुमार समेत कई लोगों ने विचार व्यक्त किए।