पटना । ई-वे बिल अब पहली अप्रैल से अनिवार्य होगा। दूसरे राज्यों (अंतर राज्य) में 50 हजार रुपये या उससे अधिक अधिक के सामान के परिवहन के लिए ई-वे बिल की आवश्यकता होगी। अंतर राज्य में सफलता के बाद ही राज्य के अंदर यह व्यवस्था लागू होगी। नई दिल्ली में बैठक के बाद जीएसटीएन मंत्री समूह के अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी ने यह जानकारी दी। एक फरवरी से लागू ई-वे बिल तकनीकी कारणों से रुक गया था।
मोदी ने बताया कि नेटवर्क सर्वर की क्षमता बढ़ा दी गई है। इससे पहली अप्रैल से 50 से 75 लाख तक ई-वे बिल प्रतिदिन जेनरेट होगा। अब तक 9.5 लाख करदाताओं तथा 8.5 हजार ट्रांसपोर्टर्स ने ई-वे बिल का निबंधन कराया हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के पहले से बिहार में लागू ‘सुविधा’ का ई-वे बिल की व्यवस्था से सरलीकरण हो गया है। निबंधित कारोबारी व ट्रांसपोटर्स अब कंप्यूटर के अलावा मोबाइल एप्लिकेशंस के जरिए भी आसानी से ई-वे बिल जेनरेट कर सकेंगे।
राज्य के अंदर ई-वे बिल की व्यवस्था लागू होने के बाद भी 10 किमी की दूरी तक 2 लाख तक मूल्य के माल के परिवहन तथा पेट्रोलियम उत्पाद (जीएसटी में शामिल नहीं) के परिवहन के लिए ई वे बिल की जरूरत नहीं होगी। पहली अप्रैल से अंतर राज्य माल परिवहन के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था लागू होने से कर वंचना की गुंजाइश नहीं रहेगी।