पटना/बिहार कारोबार न्यूज । जीएसटी व्यवस्था में पारदर्शिता की वजह से प्रशासनिक कार्यों में काफी सुधार आया है। अधिकतर सामान की कीमत कम हुई है। हालांकि अभी भी कई चुनौतियां हैं, जिसे सामूहिक प्रयास से दूर किया जाएगा। चालू वर्ष की पहली तिमाही में राजस्व संग्रह बेहतर हुआ है। बेहतर कलेक्शन होने पर नुकसान भरपाई के लिए केंद्र पर निर्भरता कम होगी। उक्त बातें डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने वाणिज्य कर विभाग द्वारा जीएसटी के एक साल पूरा होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं। इस मौके पर जीएसटी स्मारिका का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम निर्धारित समय से दो घंटे विलंब से शुरू हुआ।
डिप्टी सीएम ने रिटर्न में गड़बड़ी करने वाले कारोबारियों को नसीहत देते हुए कहा कि कंप्यूटर की आपके रिटर्न पर नजर हैै। 3 बी रिटर्न और जीएसटीआर 1 एक जैसा होना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर गड़बड़ी पकड़ी जाएगी। रिटर्न का नया फाॅर्म शीघ्र लांच होगा।
राजस्व संग्रह स्थिर हो जाने पर पेट्रोलियम प्रोडक्ट भी जीएसटी के दायरे में आएंगे। इससे उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिलेगी। हालांकि 28 फीसदी जीएसटी के अलावा राज्यों को अलग से टैक्स लगाने का अधिकार होगा। जीएसटी काउंसिल वर्तमान 4 टैक्स स्लैब को 3 करने पर विचार कर रहा है। 12 और 18 फीसदी टैक्स स्लैब को मिलाकर 15 फीसदी किया जाएगा। इस तरह 5, 15 और 28 फीसदी ही टैक्स होंगे।
ऊर्जा मंत्री : ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि जीएसटी लागू करना चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन सबकी सहभागिता से यह काम हुआ। राजस्व संग्रह बेहतर होने से विकास कार्य बेहतर होंगे। जीएसटी लागू होने के दौरान अपने अनुभवों को उन्होंने साझा किया। इस दौरान वे सूबे के वाणिज्य-कर मंत्री थे।
आयुक्त डाॅ प्रतिमा एस कुमार ने जीएसटी के सफरनामा पर प्रजेंटेशन दिया। प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी एवं सेंट्रल जीएसटी के मुख्य आयुक्त शिव नारायण सिंह ने अपने विचारों को रखा।
इस अवसर पर अपर आयुक्त अरुण मिश्रा, विभाग के वरीय अधिकारी, चैंबर आॅफ काॅमर्स एवं बीआईए के प्रतिनिधि समेत विभिन्न व्यवसाय संगठन से जुड़े कारोबारी मौजूद थे।