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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, बेतिया

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व हिमालय तराई क्षेत्र में स्थित एक अद्भुत जगह है । जिला मुख्यालय बेतिया से इसकी दूरी 70 और पटना से 350 किलोमीटर है। इसके एक तरफ पर्वत है, तो दूसरी तरफ गंडक नदी का बहाव । साथ में हरियाली । ईको टूरिज्म की यहां काफी संभावना है, जिसे बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार सजग है । इसके लिए जल संसाधन विभाग की 200 एकड़ जमीन का हस्तांतरण पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को किया गया है । 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 18 नवंबर, 2018 को पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर में ईको टूरिज्म विकास के लिए पर्यटन सुविधाओं का शुभारंभ किया । इस मौके पर डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह भी मौजूद थे। सीएम ने यहां कन्वेंशन सेंटर के निर्माण और एक बार कैबिनेट बैठक की बात कही । उन्होंने कौलेश्वर हाथी सेंटर क्षेत्र में रुद्राक्ष का पौधा भी लगाया।  

दर्शनीय स्थल : यहां 35 से अधिक बाघ हैं । पर्यटक मदनपुर रेंज में मगरमच्छ भी देख सकते हैं । 200 मीटर लंबे कोलेश्वर झूले को विकसित किया गया है । जटाशंकर मंदिर, कोलेश्वर, नरदेवी मंदिर व वाल्मीकि आश्रम मुख्य दर्शनीय स्थल हैं । पहले इस जगह का नाम भैंसालोटन था । इस जगह महर्षि वाल्मीकि के आश्रम होने के कारण नाम में बदलाव किया गया । 

सुविधा : पर्यटकों को वाल्मीकि विहार होटल समेत बैम्बू हट, ईको हट, ट्री हट, टेंट हाउस व डाॅरमेटरी के माध्यम से आवासीय सुविधा मिलेगी । कमरे व वाहनों के लिए ओंनलाइन बुकिंग भी करा सकेंगे । होटल व हट में भोजन की व्यवस्था है ।

डिप्टी सीएम ने बताया कि कमरे के किराये में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दो तिहाई कमी की गई है। भ्रमण के लिए टोकन शुल्क पर आधुनिक साईकिल भी उपलब्ध है । गंडक में नौकाविहार व जंगल सफारी के लिए बोट व खुली जीप के साथ एक बड़ी गाड़ी की सुविधा मिलेगी । शाम में वन्य जीवन पर आधारित फिल्म, स्थानीय लोक संगीत व नृत्य का कार्यक्रम भी होगा। 
 


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