पटना। ठंड बढ़ने के साथ स्वास्थ्य के प्रति सजगता भी बढ़ जाती है। खास कर सुबह और शाम सावधानी बरतनी चाहिए। खानपान और पहनावा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही होने पर बच्चे, युवा एवं बुजुर्गों को इनफ्लूएंजा (फ्लू) परेशान कर सकता है।
श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद के मुख्य चिकित्सक डाॅ अशोक कुमार सिंह का कहना है कि आयुर्वेद में भी इनफ्लूएंजा का कारगर इलाज है। आयुर्वेद बीमारी दूर करने के साथ शरीर को आंतरिक मजबूती भी देता है।
इनफ्लूएंजा के लक्षण : नाक से पानी आना, बदन में दर्द, बुखार, थकान एवं भूख की कमी।
घरेलू इलाज : 250 एमएल दूध में हल्दी पाउडर (एक चौथाई चम्मच), काली मिर्च (5 दाना), अदरक का छोटा टुकड़ा और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर उबाल लें। ठंडा होने पर इसे पी लेना है। इसे सुबह-शाम लें।
औषधि : 1-एक चाय चम्मच शुद्ध घी में बैद्यनाथ त्रिभुवन कीर्ति रस की एक गोली को पाउडर बनाकर सितोपलादि या मुलेठी चूर्ण के साथ दिन में दो बार भोजन के बाद लेना है।
2- बैद्यनाथ लक्ष्मी विलास रस नारदीय की एक गोली सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लेना है।
सावधानी : सितोपालादि चूर्ण को लेने में भी सावधानी की जरूरत है। अधिक बलगम बनने की स्थिति में ही इसे शहद के साथ लें। छाती में जकड़न या सूखी खांसी की स्थिति में इसे शुद्ध घी के साथ लेना लाभप्रद होगा।
नोट : उम्र के अनुसार दवा की मात्रा का निर्धारण होता है। इसलिए चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।