नई दिल्ली/19.02.19 । केंद्र सरकार ने स्टार्टअप कंपनियों को बड़ी राहत दी है । स्टार्टअप के लिए आयकर छूट की निवेश सीमा 10 करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये कर दी गई है । अब 25 करोड़ रुपये तक के निवेश पर स्टार्टअप कंपनियों को आय कर से छूट मिलेगी ।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने ये निर्णय ऐसे समय लिए हैं जब कई स्टार्टअप कंपनियों को एंजेल निवेश पर आयकर विभाग से नोटिस मिले हैं । एंजेल टैक्स की शुरुआत 2012 में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने की थी । इसका मकसद मनी लाॅन्ड्रिंग पर रोक लगाना था ।
वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कई सुविधाएं दी गई हैं । स्टार्ट अप दर्जा के लिए सालाना टर्नओवर की शर्त को 25 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है । 100 करोड़ से अधिक के टर्नओवर पर स्टार्टअप का दर्जा नहीं मिलेगा । अब किसी यूनिट को स्थापना या रजिस्ट्रेशन की तिथि से अगले 10 वर्षों तक एक स्टार्ट-अप के रूप में माना जाएगा । पहले अवधि 7 वर्ष थी ।
इसके अलावा 100 करोड़ रुपये नेटवर्थ या 250 करोड़ का टर्नओवर वाली लिस्टेड कंपनियों के एक स्टार्टअप में निवेश करने पर आईटी की धारा 56(2) (सात बी) के तहत छूट मिलेगी । प्रवासियों, वैकल्पिक निवेश कोष श्रेणी-1 द्वारा सुयोग्य स्टार्टअप में 25 करोड़ रुपये की सीमा के ऊपर के निवेश को भी इस धारा के तहत छूट मिलेगी ।
यदि उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को मान्यता दी है, तो वह स्टार्टअप भी धारा 56(2) (सात-बी) के तहत छूट के लिए पात्र होगा। बशर्तें वह स्टार्टअप किसी विशेष संपत्ति में निवेश नहीं कर रहा हो। स्टार्टअप को कर छूट का लाभ लेने के लिए डीपीआईआईटी के समक्ष सिर्फ हस्ताक्षरित स्वघोषणा करनी होगी । डीपीआईआईटी इन घोषणाओं को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के पास भेजेगा ।