नई दिल्ली/14.05.19। आयकर विभाग अपील मामलों का 16 से 31 मई तक निपटारा करेगा। इस दौरान करदाताओं की पिछली कर मांग (टैक्स डिमांड) को उनके लंबित रिफंड के साथ समायोजित करने पर विशेष ध्यान रहेगा।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजे पत्र में कहा है कि 16 से 31 मई के दौरान सभी आकलन अधिकारी आयकर अपील से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देंगे। भोजनावकाश से पहले का समय आवेदक, उनके अधिवक्ताओं से मिलने और मामलों को सुनने में लगायेंगे।
सीबीडीटी ने कहा है कि टीडीएस का मिलान नहीं होने पर जारी टैक्स डिमांड पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आयकर कानून की धारा 245 के तहत जारी टैक्स डिमांड जिसे लेकर करदाता सहमत नहीं हैं। उन्हें सुलझाने पर भी गौर किया जायेगा। इन मामलों की वजह से करदाताओं में काफी असंतोष है।
कर प्रशासन धारा 245 के तहत करदाताओं को दिये जाने वाले रिफंड को पहले की कर मांग के लिए समायोजित कर सकता है। सीबीडीटी की इस पहल से अगले एक माह में बड़ी संख्या में लंबित रिफंड का भुगतान जारी हो सकता है। पिछले साल मई में भी इसी तरह के पखवाड़े का आयोजन किया गया था।
सीबीडीटी ने कर विवाद में कमी लाने के लिए जुलाई 2018 में आयकर विभाग की अधिकार सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी है। इसी तरह हाईकोर्ट में उन मामलों को ले जाया जायेगा, जहां विवादित राशि 50 लाख रुपये होगी। पहले यह सीमा 20 लाख रुपये थी। सुप्रीम कोर्ट में उन्हीं मामलों को चुनौती दी जायेगी, जहां विवादित कर राशि एक करोड़ रुपये होगी।